रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा स्वेच्छा से देश छोड़ने की 31 मार्च की समयसीमा समाप्त होने के बाद से अब तक 19 लोगों के हिरासत केंद्र से लापता होने की भी सूचना है। प्रमुख दैनिक ‘डॉन’ ने बताया कि संघीय राजधानी क्षेत्र में बिना दस्तावेज रह रहे अफगान नागरिकों के खिलाफ अभियान तेज किया गया है।
पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वह रोजाना अवैध अफगान नागरिकों, अवैध किरायेदारों, होटलों और ट्रैवल एजेंसियों की जांच कर कार्रवाई करे। अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि यदि रिकॉर्ड में प्रविष्टियां दर्ज नहीं की गईं तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
रावलपिंडी में टेनेंसी एक्ट के उल्लंघन के खिलाफ भी विशेष अभियान चलाया गया है, जिसके तहत 38 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस प्रवक्ता के अनुसार चोन्ट्रा, चक्री, कहूटा, नसीराबाद, चकलाला, जतली, सदर बरूनी और कल्लर सैयदां सहित कई इलाकों में कार्रवाई की गई।
सीपीओ सैयद खालिद महमूद हमदानी के आदेश पर रोजाना सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने किरायेदारों और कर्मचारियों का पंजीकरण संबंधित थाने में कराएं।
इस बीच, पिछले महीने काबुल में तालिबान शासन ने कहा था कि पाकिस्तान में अफगान शरणार्थियों की समस्याएं बढ़ रही हैं। तालिबान के उप प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने एक ऑडियो संदेश में कहा कि अफगान शरणार्थियों को गिरफ्तारी, उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से शरणार्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करने की अपील की। फितरत ने कहा कि जो अफगान शरणार्थी वापस अफगानिस्तान लौटे हैं, उन्हें आर्थिक सहयोग और समर्थन की जरूरत है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने पिछले एक वर्ष में देशव्यापी अभियान के तहत हजारों अफगान प्रवासियों को वापस भेजा है। इस कार्रवाई से पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं सहित कई लोग प्रभावित हुए हैं।
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