प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फरवरी से इज़राइल की दो दिवसीय यात्रा पर जा रहे हैं। इस यात्रा से पहले इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन ने ‘हेक्सागन ऑफ अलायंसेज़’ के नाम से नए क्षेत्रीय गठबंधन प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए भारत को इसका हिस्सा बनने का निमंत्रण दिया है। उन्होंने कहा कि यह छह देशों का गठबंधन होगा, जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में तथाकथित कट्टर शिया धुरी का मुकाबला करना है।
नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक की शुरुआत में मोदी की यात्रा को ऐतिहासिक बतया है। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “आज सुबह, हमारी कैबिनेट मीटिंग की शुरुआत में, मैंने अपने प्यारे दोस्त, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बुधवार को होने वाले ऐतिहासिक इज़राइल दौरे के बारे में बात की।” उन्होंने भारत-इज़राइल संबंधों को दो वैश्विक नेताओं के बीच शक्तिशाली गठबंधन भी बताया और कहा कि दोनों देश नवाचार, सुरक्षा और साझा रणनीतिक दृष्टि में साझेदार हैं।
This morning, at the opening of our Cabinet meeting, I spoke about the historic visit of my dear friend, Prime Minister @narendramodi, to Israel this coming Wednesday. 🇮🇱🤝🇮🇳
The bond between Israel and India is a powerful alliance between two global leaders. We are partners in… pic.twitter.com/8cW2ltKdzK
— Benjamin Netanyahu – בנימין נתניהו (@netanyahu) February 22, 2026
नेतन्याहू के अनुसार यह छह पक्षीय गठबंधन पश्चिम एशिया और उसके आसपास के देशों को शामिल करेगा। जिन देशों का उन्होंने उल्लेख किया, उनमें भारत, ग्रीस, साइप्रस और कुछ अन्य अरब, अफ्रीकी तथा एशियाई देश शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “मेरे सामने जो विज़न है, उसके हिसाब से हम एक पूरा सिस्टम बनाएंगे, असल में वेस्ट एशिया के आस-पास या उसके अंदर अलायंस का एक ‘हेक्सागन’… यहां मकसद देशों का एक ऐसा एक्सिस बनाना है जो असलियत, चुनौतियों और लक्ष्यों पर रेडिकल एक्सिस के खिलाफ एकमत हों, रेडिकल शिया एक्सिस, जिस पर हमने बहुत ज़ोरदार हमला किया है, और उभरता हुआ रेडिकल सुन्नी एक्सिस दोनों।”
यह पहल भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) की अवधारणा से मिलती-जुलती हो सकती है, जिसका उद्देश्य कनेक्टिविटी के जरिए आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। प्रस्तावित ‘हेक्सागन’ आर्थिक सहयोग, कूटनीतिक तालमेल और सुरक्षा साझेदारी इन तीन स्तंभों पर आधारित होगा।
बता दें की, यह 2017 के बाद प्रधानमंत्री मोदी की इज़राइल की दूसरी यात्रा है। यह यात्रा गाज़ा में इज़राइल-हमास संघर्ष के बाद हुए युद्धविराम के महीनों बाद हो रही है। दो दिवसीय दौरे के दौरान मोदी के इज़राइल की संसद ‘नेसेट’ को संबोधित करने की संभावना है, जिसे एक विशेष सम्मान माना जाता है।
दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी, सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कृषि, जल प्रबंधन और व्यापार जैसे क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। रक्षा सहयोग के तहत एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल शील्ड, लेजर हथियार, ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के संयुक्त विकास पर भी चर्चा हो सकती है, साथ ही उन्नत प्रणालियों जैसे आयरन डोम, डेविड्स स्लिंग और एरो पर सहयोग बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है।
यात्रा से पहले मोदी ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “धन्यवाद, मेरे दोस्त, प्रधानमंत्री नेतन्याहू… भारत, इज़राइल के साथ पक्की दोस्ती को बहुत महत्व देता है, जो भरोसे, इनोवेशन और शांति और तरक्की के लिए एक जैसी कमिटमेंट पर बनी है। अपनी आने वाली इज़राइल यात्रा के दौरान हमारी बातचीत का इंतज़ार रहेगा।”
תודה לך ידידי , ראש הממשלה נתניהו.
אני מסכים לחלוטין עם דבריך באשר לקשר העמוק בין הודו לישראל ולאופיים הרב־ממדי של יחסינו הדו־צדדיים. הודו מייחסת חשיבות רבה לידידות האיתנה והמתמשכת עם ישראל — ידידות המבוססת על אמון הדדי, חדשנות, ושאיפה משותפת לשלום, ולקדמה.
אני מצפה בכיליון… https://t.co/snGra7RB3g
— Narendra Modi (@narendramodi) February 22, 2026
इस प्रस्तावित ‘हेक्सागन ऑफ अलायंसेज़’ और पीएम मोदी की यात्रा को क्षेत्रीय भू-राजनीति में संभावित नए संतुलन के रूप में देखा जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भारत इस पहल पर क्या रुख अपनाता है और बातचीत के बाद कौन-कौन से ठोस कदम सामने आते हैं।
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