यह प्रधानमंत्री मोदी की किर्गिस्तान की तीसरी यात्रा होगी। बीरेंद्र सिंह ने बताया, “पीएम मोदी पहले 2015 की आधिकारिक यात्रा पर, दूसरी बार 2019 में एससीओ समिट में भाग लेने आए थे। अब किर्गिस्तान में फिर एससीओ सम्मेलन का आयोजन हो रहा है तो वो 26वीं बैठक में हिस्सा लेने आ रहे हैं।”
भारत के राजदूत ने आगे कहा, “एससीओ समिट से इतर प्रधानमंत्री किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। दोनों नेता भारत-किर्गिस्तान संबंधों की व्यापक समीक्षा करने के साथ ही सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान पर भी विचार-विमर्श करेंगे।
बीरेंद्र सिंह के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की पिछले पांच साल में प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2019 में रक्षा सहयोग पर डिफेंस पर संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) गठित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह संयुक्त कार्य समूह नियमित रूप से बैठक करता है और दोनों देशों के प्रतिनिधि रक्षा सहयोग के लिए वार्षिक कार्ययोजना तैयार करते हैं।
वहीं रक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को लेकर उन्होंने कहा, “भारत और किर्गिस्तान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘खंजर’ भी नियमित रूप से आयोजित किया जाता है। इस वर्ष यह अभ्यास भारत के मीसामारी में हुआ, जबकि अगला अभ्यास फरवरी में किर्गिस्तान में आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा, भारत रक्षा क्षेत्र में क्षमता निर्माण के लिए किर्गिस्तान को प्रशिक्षण और विशेष रूप से तैयार किए गए पाठ्यक्रम भी उपलब्ध कराता है।”
भीष्म क्यूब का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया, “अप्रैल में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जब किर्गिस्तान आए थे तो उन्होंने दो ‘भीष्म क्यूब’ भी उपहार में दिए थे। दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने में ऐसे सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एससीओ में भारत के राजदूत ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “किर्गिस्तान की अध्यक्षता में चल रहे शंघाई सहयोग संगठन (एसीसीओ) के दौरान आतंकवाद के मुद्दे को भी भारत ने प्रमुखता से उठाया है। भारत लगातार एसीसीओ के मंच से आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद और कट्टरपंथ के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।
उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा, भारत के विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने एसीसीओ से जुड़ी अन्य बैठकों में भी हिस्सा लिया। भारत की उच्चस्तरीय की भागीदारी होती है।
बीरेंद्र सिंह यादव के मुताबिक, “भारत-किर्गिस्तान संबंधों में रक्षा और सुरक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य दोनों देशों की क्षमताओं को मजबूत करना है, ताकि आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद और कट्टरपंथ जैसी साझा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।”
