उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर 9 अक्टूबर को हुए ऐतिहासिक आयोजन ने यह साबित कर दिया कि बहुजन समाज आज भी पूरी मजबूती से पार्टी के मिशन, विचारधारा और नेतृत्व के साथ खड़ा है। उन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने वाले सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को हार्दिक बधाई दी।
बसपा मुखिया मायावती ने कहा कि बसपा अन्य दलों की तरह पूंजीपतियों और उद्योगपतियों के सहारे नहीं चलती। यह सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के मिशन पर चलने वाला संगठन है, जो दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, मुस्लिमों और अन्य कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए संघर्षरत है।
उन्होंने कहा कि सपा सरकार ने जातिवादी द्वेष के कारण महान संतों, गुरुओं और महापुरुषों के नाम पर बने संस्थानों, जिलों और विश्वविद्यालयों के नाम बदलकर बहुजन समाज का अपमान किया है। यही नहीं, इन वर्गों के लिए बनाई गई योजनाओं को निष्क्रिय कर दिया गया, जो राजनीतिक द्वेष और छल का प्रतीक है।
मायावती ने दो टूक कहा कि बसपा कभी साम, दाम, दंड, भेद जैसी राजनीति नहीं करती। हमारी राजनीति एक खुली किताब की तरह साफ-सुथरी है। बसपा की पहचान ईमानदारी, समर्पण और सेवा से है, न कि झूठे प्रचार या साजिश से।
बैठक में यह भी तय किया गया कि ‘बहुजन मिशन 2027’ के तहत पार्टी गांव-गांव जाकर जनता से संवाद करेगी। वरिष्ठ नेता अपने-अपने क्षेत्रों में जनसभाएं करेंगे और लोगों को बताएंगे कि बीएसपी ही प्रदेश में कानून-व्यवस्था और जनकल्याण की सच्ची गारंटी है।
एनडीए 2025 में 225 सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान में है : अजय आलोक!



