शिवसेना-यूबीटी की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच भारत की विदेशी नीति पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हम ईरान पर हुए हमलों पर चुप्पी साधकर बैठे थे। सरकार पश्चिमी एशिया में हुए हमलों पर चुप रही।
प्रियंका चतुर्वेदी ने पीएम मोदी के उस बयान को गलत बताया, जिसमें कहा गया कि कांग्रेस की टिप्पणियां खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती हैं। शिवसेना-यूबीटी की नेता ने कहा, “जिस तरह से हमारी विदेश नीति चल रही है, जहां हम ईरान पर हुए हमलों पर चुप्पी साधकर बैठे थे। युद्ध से दो दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल का दौरा किया था। भारत ने पश्चिमी एशिया में हुए हमलों पर चुप्पी साधकर रखी।”
भारत में चुनौतियों की बात करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने पूछा, “क्या यह सच्चाई नहीं है कि जनता सिलेंडर के लिए रास्तों पर खड़ी हुई है? क्या यह सच्चाई नहीं है कि चुनावों को ध्यान में रखकर पेट्रोल की कीमतों को कम कीमत के लिए एक्साइज ड्यूटी घटाई गई है? क्या इसमें सच्चाई नहीं है कि एलपीजी गैस के दाम बढ़ाए गए हैं? क्या इस बात में भी सच्चाई नहीं है कि जो एयरलाइन चल रही थीं, उनकी फ्लाइट्स काफी कम हो चुकी हैं, जिससे विदेश में रहने वाले भारतीय, जो लौटना चाहते हैं, वह नहीं लौट पा रहे हैं?”
घुसपैठियों को वापस भेजने के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर उन्होंने कहा, “घुसपैठ को रोकने और घुसपैठियों को बाहर करने की जिम्मेदारी गृह मंत्री की होती है। वे सीमा सुरक्षा को लेकर सबसे विफल गृह मंत्री हैं।”
उन्होंने कहा, “2014 से देश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। अगर आप बांग्लादेशियों को वापस भेजे जाने के आंकड़े देखेंगे तो वह यूपीए के कार्यकाल में ज्यादा था। जनता को भी यह आंकड़े देखने चाहिए। सच्चाई यह है कि घुसपैठियों के नाम से भाजपा को राजनीतिक फायदा होता है। उन्हें लगता है कि वे घुसपैठियों के नाम पर धुर्वीकरण कर सकेंगे और एक मुद्दे को हमेशा ज्वलंत बनाए रखेंगे।”
जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “जेवर एयरपोर्ट का काफी समय से काम चल रहा था और उसका उद्घाटन हुआ है, जिसका मैं स्वागत करती हूं, लेकिन सवाल उठता है कि यह सिर्फ चुनावों के बीचों-बीच ऐसा करते हैं। उत्तर प्रदेश में 7-8 एयरपोर्ट उद्घाटन के बाद से लगभग बंद हैं। यह दिखाता है कि सरकार चुनावों को देखते हुए योजनाओं का उद्घाटन करती है।”
खार्ग के अलावा ईरान के लारक, अबू मूसा और केशम द्वीपों पर अमेरिकी नजर



