लोकसभा में पेपर लीक पर मंगलवार को चर्चा की शुरुआत हुई. मोदी सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल लाया, जिसपर 10 घंटे चर्चा होगी. सरकार की ओर से इसकी शुरुआत केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने की. उन्होंने यूपीए सरकार के दौरान हुए पेपर लीक को लेकर कांग्रेस को घेरा. डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछली सरकारों ने पेपर लीक पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की.
उन्होंने कहा कि 2009 में रेलवे परीक्षा का पेपर लीक हुआ. 2012 में दिल्ली एम्स परीक्षा का पेपर लीक हुआ. पेपर लीक एक प्रदेश की समस्या नहीं है. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2010, 2011 और 2012 में भी पेपर लीक हुए. पेपर लीक के खिलाफ विशेष कानून की दरकार है. डॉ जितेंद्र सिंह के बाद कांग्रेस की ओर से चर्चा की शुरुआत गौरव गोगोई ने की. उन्होंने पेपर लीक को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा. गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार शिक्षा विभाग को लेकर गंभीर नहीं है. एंटी पेपर लीक बिल सिर्फ दिखावे के लिए है. 2024 में ये बिल लाया गया था. उस समय सरकार ने इसे ऐतिहासिक बताया था.
गोगोई ने कहा कि पुराने बिल में संशोधन कर नया बताया गया है. 2024 में भी सरकार ने बड़ी-बड़ी बातें की थीं. उस वक्त यूजीसी को लेकर लोगों में चिंता थी. नीट-यूजी 2024 के 45 में से 41 अभियुक्तों को जमानत मिल चुकी है. उस समय भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ही थे. इस्तीफे के बाद भी धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान किया गया. व्यापक चर्चा के बजाय सोशल मीडिया पर फोकस किया जा रहा है.
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