ऑपरेशन सिंदूर में दिखा संकल्प, आतंकवाद पर भारत का सख्त संदेश: जयशंकर!

इस बात पर जोर दिया कि शांति और सुरक्षा के लिए ऐसे गंभीर खतरे का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जाएगा।

ऑपरेशन सिंदूर में दिखा संकल्प, आतंकवाद पर भारत का सख्त संदेश: जयशंकर!

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‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक साल पूरे होने पर व‍िदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति पूरी तरह सख्त और ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली है।

व‍िदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर पोस्‍ट में कहा, ”एक साल पहले ‘ऑपरेशन स‍िंदूर’ ने पाकिस्तान से होने वाले सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ खुद की रक्षा करने के देश के संकल्प को प्रदर्शित किया था। भारत ने अपने निर्णायक कदमों से आतंकवादी गतिविधियों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित की।

इस बात पर जोर दिया कि शांति और सुरक्षा के लिए ऐसे गंभीर खतरे का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश देने के लिए मतबूती और दृढ़ता के साथ खड़ा है।”

दूसरी तरफ, भारतीय नौसेना के वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने गुरुवार को बताया कि पिछले वर्ष 6-7 मई की रात नौसेना के जवानों ने भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत आतंकवादी ढांचों पर प्रिसीजन स्ट्राइक में भाग लिया।

इस स्ट्राइक ने तीनों सेनाओं के संयुक्त अभियान की भावना को और मजबूत किया। जैसे-जैसे अभियान आगे बढ़ा, भारतीय नौसेना की अग्रिम तैनाती ने पाकिस्तान की नौसैनिक और वायु इकाइयों को रक्षात्मक स्थिति में जाने के लिए मजबूर कर दिया। वे मुख्यत: बंदरगाहों तक सीमित रहीं या अपने तट के निकट ही संचालित होती रहीं।

वहीं, ग्रीस के मीडिया हाउस ग्रीस सिटी टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया क‍ि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने 2026 में पाकिस्तान के आर्थिक संकट को और गहरा कर दिया। इसके कारण निवेशकों का भरोसा कम हुआ है। वहीं, पर्यटन, विमानन क्षेत्र और सैन्य निर्यात जैसे उभरते हुए क्षेत्रों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।

मई 2025 के सैन्य अभियान ने महंगाई को बढ़ा दिया है। साथ ही विकास की गति और निवेशकों के विश्वास को कम कर दिया। इससे देश की पहले से ही कमजोर आर्थिक स्थिति और खराब हो गई है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने निवेशकों का विश्वास कम कर दिया और संभवतः कई निवेशकों को प्रतीक्षा करने और स्थिति का सामना करने के लिए मजबूर कर दिया है।

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