विधानमंडल परिसर में गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान सिद्दीकी ने कहा, “छात्रों पर लाठी चलाने वाली सरकार को बदलना होगा।” उन्होंने सरकार के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि प्रदर्शन में छात्र शामिल नहीं थे।
राजद नेता ने उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के बयान का भी जिक्र करते हुए कहा कि छात्र आंदोलनों को खारिज करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों का बिहार के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और सत्ता में बैठे लोगों को इसे नहीं भूलना चाहिए।
सिद्दीकी ने दावा किया कि दिल्ली और पटना में चल रहा आंदोलन पूरी तरह छात्रों का स्वतःस्फूर्त आंदोलन है और इसमें किसी भी राजनीतिक दल की भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर सड़क पर उतरे हैं तथा सरकार उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस आंदोलन ने राजनीतिक परिवर्तन की नींव रखी थी और आज भी छात्र उसी तरह बदलाव की ताकत बन सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के मद में सरकार युवाओं के भविष्य और उनके अधिकारों की अनदेखी कर रही है। सरकार अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास कर रही है।
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इस पूरे घटनाक्रम में कुछ नेताओं की भूमिका से स्थिति और खराब हुई है। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने और बल प्रयोग के बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की।
कॉमनवेल्थ गेम्स में मांडविया संग भारतीयों ने बुलंद किया ‘चीयर 4 भारत’!
