भारत और रूस के बीच आपसी रिश्ते तो पब्लिक डोमेन में हैं, लेकिन रूस ने एक बार फिर कच्चे तेल की सप्लाई पर कमेंट किया है। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने साफ किया है कि भारत की एनर्जी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए रूस जितना ज़रूरी कच्चा तेल सप्लाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है। अगर भारत रूस से तेल खरीदता है तो US की तरफ से 100 परसेंट टैरिफ लगाने की धमकी के बाद, अलीपोव ने US समेत पश्चिमी देशों की पॉलिसी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस एक्शन को भारत पर दबाव बनाने की एक चाल बताया।
अलीपोव ने कहा कि रूस से तेल खरीदना भारत का अपना फैसला है, और भारत यह खरीद रूस की मदद करने के लिए नहीं, बल्कि अपने 1.4 बिलियन नागरिकों के विकास और अपनी एनर्जी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कर रहा है। उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत को अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से अपने एनर्जी सोर्स चुनने का पूरा हक है। रूसी राजदूत ने साफ कहा कि मॉस्को भारत की एनर्जी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए कमिटेड है। रूस के पास भारत की ज़रूरत के हिसाब से तेल सप्लाई करने की कैपेसिटी और तैयारी है। उन्होंने पश्चिमी देशों के लगाए गए बैन और टैरिफ की भी आलोचना की और उन्हें फ्री ट्रेड के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ सख्त आर्थिक कार्रवाई करने का रुख अपनाया है। ऐसे देशों के प्रोडक्ट्स पर 100 परसेंट टैरिफ लगाने की संभावना से भारत-रूस तेल व्यापार फिर से चर्चा में आ गया है। हालांकि, भारत ने भी अपनी स्थिति साफ कर दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में कहा था कि रूस से तेल खरीदना बंद करने से रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म नहीं होगा। भारत का रुख है कि युद्ध का हल सिर्फ बातचीत और डिप्लोमेसी से ही निकल सकता है।
यह भी पढ़ें-
