भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में ऐतिहासिक अदवा मेमोरियल म्यूजियम में एक खास मीटिंग को संबोधित करते हुए ग्लोबल सिस्टम के दोहरेपन पर निशाना साधा। उन्होंने उन देशों की कड़ी आलोचना की जो यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) में लंबे समय से पेंडिं सुधार प्रक्रिया में जानबूझकर देरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सिक्योरिटी काउंसिल आधुनिक दुनिया की सच्चाई को दिखाने में पूरी तरह से फेल रही है और इसका सही तरीके से प्रतिनिधित्व नहीं करती है।
A pleasure to address a distinguished gathering at the Adwa Memorial Museum, Addis Ababa.
Spoke about the India – Africa Partnership, that is historic, based on shared solidarities and one which seeks fairness, representation, opportunity and the freedom to shape our own future.
Highlighted :
➡️ How ‘Viksit Bharat by 2047’ and ‘Agenda 2063’ visions emphasise industrialisation. And that it must not be denied by flooding our markets with cheap goods or by restricting our market access.
➡️ Our robust trade and investment relationship, in manufacturing, telecommunications, pharmaceuticals, energy, mining, agriculture, infrastructure, financial services and information technology.
➡️ Our mutual conviction for self-reliance, a viable basis for the future of our enduring partnership.
➡️ Our Development partnership will respond to the priorities of our partners. India has supported more than 220 projects in power generation, electricity transmission, water, agriculture, railways, health, manufacturing and public infrastructure.
➡️ Our commitment to building capacities. In the last decade, more than 70,000 African students and professionals have been supported by India in this aspect.
➡️ The transformative impact of digital governance, as well as growing India stack cooperation with Africa. Space, Drone and AI are new frontiers of this cooperation.
➡️ Our efforts to promote Africa’s health security, including through Vaccine support, Pharmaceutical investments and gifting Bhabatron cancer machines.
➡️ The promise of deeper cooperation in agri productivity, climate-resilient practices, value-add and food processing. Partnerships of the future must help create capabilities, not dependencies.
➡️ Our deepening security & maritime cooperation as well as our India’s contribution of peacekeeping operations in Africa.
➡️ The importance of reformed multilateralism reflective of contemporary realities. The inclusion of AU in G20 during 🇮🇳’s presidency is a step-forward.
➡️ That Africa will remain among India’s highest priorities, as articulated by PM Modi in Kampala.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) October 9, 2026
जयशंकर ने साफ किया कि ग्लोबल फैसले लेने के स्टेज पर भारत और अफ्रीकी महाद्वीप का न होना या कम प्रतिनिधित्व आज की 21वीं सदी में बिल्कुल मंजूर नहीं है। भारत और अफ्रीकी देश पुराने ग्लोबल ऑर्डर का खामियाजा भुगत रहे हैं, और अब मल्टीलेटरल संस्थानों में बड़े बदलाव का समय आ गया है। UNSC की अहमियत कम होने की असली वजह: बेअसर और अधूरा रिप्रेजेंटेशन
अपनी स्पीच में, डॉ. जयशंकर ने यूनाइटेड नेशंस की मौजूदा हालत पर बहुत डिटेल में बात की। पिछले एक दशक में ग्लोबल संकटों, युद्धों और आर्थिक चुनौतियों के सामने, यूनाइटेड नेशंस लगातार लाचार और बेअसर साबित हुआ है। इसका मुख्य कारण यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और सबसे तेज़ी से बढ़ती इकॉनमी का सिक्योरिटी काउंसिल में ठीक से रिप्रेजेंटेशन नहीं है।
उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी काउंसिल में सुधारों का मुख्य मकसद मौजूदा सिस्टम में सिर्फ कुछ और सीटें या सीटें जोड़ना नहीं है। बल्कि, इन सुधारों का असली मकसद ग्लोबल गवर्नेंस को ज़्यादा डेमोक्रेटिक, अकाउंटेबल और सही मायने में रिप्रेजेंटेटिव बनाना है। जब तक सभी कॉन्टिनेंट्स को इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशन्स में उनका सही हिस्सा नहीं मिल जाता, तब तक यूनाइटेड नेशंस अपनी क्रेडिबिलिटी और असर वापस नहीं पा सकेगा।
G20 में अफ्रीकन यूनियन की सफलता और यूनाइटेड नेशंस का रास्ता
भारत ने अपनी स्ट्रेटेजिक भूमिका के ज़रिए हमेशा ग्लोबल लेवल पर डेवलपिंग और अफ्रीकी देशों की आवाज़ उठाई है। 2023 में भारत की G20 प्रेसीडेंसी के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय डिप्लोमेसी ने अफ्रीकन यूनियन को इस अहम ग्लोबल फोरम का परमानेंट मेंबर दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
इस सफलता को याद करते हुए, डॉ. जयशंकर ने साफ किया कि G20 में अफ्रीका को जो न्याय और सिद्धांत मिला, वही यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल के सुधारों पर भी लागू होना चाहिए। अफ्रीकी महाद्वीप को यूनाइटेड नेशंस की परमानेंट और टेम्पररी, दोनों कैटेगरी में पूरा और सही रिप्रेजेंटेशन मिलना चाहिए।
हजारों साल पुराने भारत-अफ्रीका संबंध और भविष्य के लिए साझा सपने
भारत और अफ्रीकी महाद्वीप के बीच संबंध सिर्फ आज के डिप्लोमैटिक संबंधों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी हजारों सालों की एक समृद्ध ऐतिहासिक विरासत है। दोनों क्षेत्रों ने आजादी के बाद से कॉलोनियलिज्म के खिलाफ लड़ाई लड़ी है और आम आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना किया है। जयशंकर ने दोहराया कि अफ्रीका हमेशा से भारत की विदेश नीति में टॉप प्रायोरिटी रहा है और आगे भी रहेगा।
भविष्य के लक्ष्यों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत 2024 तक, अपनी आज़ादी की 100वीं सालगिरह के मौके पर ‘डेवलप्ड इंडिया’ बनाने के सपने की तरफ काम कर रहा है। दूसरी तरफ, अफ़्रीकी महाद्वीप ने भी अपनी तरक्की का नक्शा बनाया है और ‘एजेंडा 2063’ के ज़रिए एक खुशहाल अफ़्रीका की तस्वीर बनाई है। दोनों देशों का यह साझा लक्ष्य न सिर्फ़ अपने-अपने इलाकों का विकास करेगा, बल्कि दुनिया को ज़्यादा बैलेंस्ड और मल्टीपोलर बनाने में भी अहम योगदान देगा।
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