उन्होंने कहा कि संघ भारत का सबसे बड़ा संगठन है और समाज को जोड़ने की दिशा में इसके प्रयासों का स्वागत किया जाना चाहिए। मौलाना रजवी ने कहा कि डॉ. मोहन भागवत भारत की महान शख्सियत और विद्वान व्यक्ति हैं। वे समय-समय पर ऐसे विचार रखते हैं जिससे देश में सकारात्मक सोच को बल मिलता है।
उन्होंने याद दिलाया कि भागवत ने पहले भी कहा था कि हर मस्जिद के नीचे मंदिर मत तलाशो और हाल ही में दिल्ली के विज्ञान भवन में दोहराया कि हर जगह शिवलिंग मत तलाशो।
रजवी ने आगे कहा कि उपद्रव फैलाने वाले संगठनों पर अब अंकुश लगेगा और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनेगा। देश की तरक्की के लिए किसी भी समुदाय से टकराव नुकसानदेह है। नफरत और टकराव से न व्यक्ति, न समाज और न ही देश आगे बढ़ सकता है। सभी समुदायों को मिलजुलकर रहना होगा।
संघ प्रमुख के विचारों से मुसलमानों में यह उम्मीद जगी है कि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगेगी। उन्होंने दोहराया कि देश की भलाई आपसी भाईचारे और सहयोग से ही संभव है। भागवत जी के संदेश को गंभीरता से लिया जाए तो भारत की एकता और तरक्की और मजबूत होगी।
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