मराठा आरक्षण के मुद्दे पर महाराष्ट्र की राजनीति लगातार गरमाती जा रही है। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने गुरुवार को राज्य के मंत्री छगन भुजबळ को निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि उन्हें लगता है कि सरकार ने ओबीसी समुदाय के साथ अन्याय किया है, तो उन्हें अपनी आत्मसम्मान और नैतिकता के आधार पर तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
राउत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “अगर वे मानते हैं कि उनकी जाति के साथ अन्याय हुआ है और वे उस समुदाय का नेतृत्व कर रहे हैं, तो उन्हें मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना चाहिए। (पूर्व केंद्रीय मंत्री) सी. डी. देशमुख ने भी नेहरू से मतभेद होने पर इस्तीफा दिया था। अगर आप (भुजबळ) कैबिनेट मीटिंग का बहिष्कार कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि आपको मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं है। ऐसे में आत्मसम्मान और नैतिक आधार पर त्यागपत्र देना ही सही रास्ता है।”
भुजबळ ने बुधवार (3 सितंबर)को मंत्रिमंडल की बैठक में हिस्सा नहीं लिया और सरकार के उस फैसले पर नाराजगी जताई जिसमें योग्य मराठाओं को कुनबी (OBC) प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया गया है। उन्होंने इशारा किया कि इस फैसले को लेकर वे कानूनी चुनौती भी दे सकते हैं।
संजय राउत ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर मराठा आंदोलन को हवा दी ताकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने मुश्किल खड़ी हो। उन्होंने कहा,“शिंदे का मकसद आरक्षण सुरक्षित करना नहीं था, बल्कि फडणवीस को चुनौती देना था। आंदोलनकारियों को बड़ी संख्या में मुंबई लाने के पीछे भी शिंदे का ही हाथ था। सरकार के भीतर कुछ लोग चाहते थे कि मनोज जरांगे अपना अनशन न तोड़ें और फडणवीस सरकार फंस जाए।”
ज्ञात हो कि आरक्षण के लिए आंदोलन चला रहे मनोज जरांगे ने मंगलवार (2 सितंबर)को अपना पांच दिवसीय आमरण अनशन सरकार से आश्वासन मिलने के बाद समाप्त कर दिया। राज्य सरकार ने उसी दिन एक सरकारी आदेश (GR) जारी कर मराठा समाज के योग्य लोगों को कुनबी जाति का प्रमाणपत्र देने की घोषणा की। जरांगे ने भरोसा जताया है कि उनके समाज को अब आरक्षण का लाभ मिलेगा।
यह भी पढ़ें:
यूके में भारतीय युवक की बाइक चोरी सुन शशि थरूर ने ब्रिटिश म्यूजियम पर कसा तंज!
भारत-सिंगापुर संबंध साझा मूल्यों और परस्पर हितों पर आधारित: पीएम मोदी!
आतंकवाद विरोध में सभी मानवतावादी देशों का कर्तव्य निभाना जरूरी : मोदी!



