वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आत्मनिर्भरता केंद्र सरकार की आर्थिक रणनीति का मुख्य सिद्धांत है और इस बजट में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर फोकस किया गया है।
केंद्रीय बजट 2026-27 पर चर्चा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में कहा कि बजट का फोकस घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में विस्तार करने और देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है। साथ ही यह नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करता है।
वित्त मंत्री ने संसद में कहा कि जीवन को आसान बनाने, रोजगार पैदा करने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और घरेलू क्रय शक्ति बढ़ाने के उद्देश्य से किए गए उपाय हमारे इसी दृष्टिकोण का हिस्सा हैं।
उन्होंने आगे कहा कि बजट ऐसे दुर्लभ समय ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ पर आया है, जब देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और महंगाई दर निचले स्तर पर है।
यह गोल्डीलॉक्स मोमेंट किस्मत से नहीं, बल्कि सरकार के लगातार प्रयासों, सावधानीपूर्वक योजना बनाने और समय पर नीतिगत फैसलों के कारण आया है।
वित्त मंत्री ने कहा,”राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 2025-26 के लिए 7.4 प्रतिशत अनुमानित है, जबकि नॉमिनल वृद्धि दर लगभग 8 प्रतिशत अनुमानित है।”
मानव पूंजी विकसित करने के कदमों पर प्रकाश डालते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने अगले पांच वर्षों में एक लाख संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवर तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
मंत्री ने कहा, “चालू वर्ष में इस पहल के लिए 1,000 करोड़ रुपए का परिव्यय प्रदान किया गया है। इस कदम से न केवल नौकरियां पैदा होंगी बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं भी मजबूत होंगी और चिकित्सा पर्यटन के विकास में सहायता मिलेगी।”
सीतारमण ने एक उच्च स्तरीय शिक्षा-से-रोजगार और उद्यम स्थायी समिति के गठन की भी घोषणा की।
समिति 2047 तक वैश्विक सेवा बाजार के 10 प्रतिशत पर कब्जा करने के लक्ष्य के साथ, सेवा क्षेत्र के लिए भारत के युवाओं को तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
उन्होंने कहा, “फोकस के प्रमुख क्षेत्रों में आईटी, फिनटेक, लॉजिस्टिक्स, हेल्थकेयर, पर्यटन और रचनात्मक सेवाएं शामिल होंगी।”
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