कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने पार्टी छोड़ने की अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात के एक दिन बाद उन्होंने यह जवाब दिया। थरूर ने स्पष्ट किया कि वह न केवल कांग्रेस में बने रहेंगे, बल्कि आगामी केरल विधानसभा चुनावों में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के अभियान का नेतृत्व भी करेंगे।
शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में थरूर ने कहा, “मैं कांग्रेस में हूं और कहीं नहीं जा रहा हूं। मैं केरल अभियान का हिस्सा रहूंगा और UDF की जीत के लिए काम करूंगा। आने वाले केरल विधानसभा चुनावों में मैं कांग्रेस का नेतृत्व करते हुए सबसे आगे रहूंगा।” उन्होंने अपनी वफादारी पर बार-बार सवाल उठाए जाने पर भी नाराजगी जताई और कहा, “मुझसे ही यह सवाल क्यों पूछा जाता है कि मैं कांग्रेस में रहूंगा या नहीं? मैं मजबूती से कांग्रेस के साथ रहूंगा।”
थरूर ने इस दौरान राहुल गांधी की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा, “वह स्पष्ट राजनीतिक स्टैंड वाले नेता हैं। वह ऐसे नेता हैं जो सांप्रदायिकता का विरोध करते हैं।” थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी की आधिकारिक लाइन उनके लिए सर्वोपरि है, हालांकि कुछ परिस्थितियों में वह व्यक्तिगत राय भी रखते हैं। उनके शब्दों में, “जिन मामलों पर पार्टी का रुख तय है, वहां मैं कोई अलग राय व्यक्त नहीं करता। कुछ स्थितियों में मैं अपनी व्यक्तिगत राय रखता हूं। जब मुझे विकास से जुड़ी अच्छी बातें दिखती हैं, तो मैं उन्हें सामने रखता हूं।”
वरिष्ठ नेता ने कहा कि उनका फोकस आंतरिक राजनीति के बजाय राष्ट्रीय मुद्दों पर है। “मैं राजनीति की अंदरूनी बातों पर नहीं, बल्कि देश के लिए बोलना चाहता हूं। मैं यह 2009 से कहता आ रहा हूं। पार्टी के आधिकारिक रुख का विरोध करने का किसी को अधिकार नहीं है।”
थरूर की यह प्रतिक्रिया संसद भवन परिसर में खड़गे और राहुल गांधी के साथ हुई लंबी बैठक के बाद आई है। करीब एक घंटा 45 मिनट चली इस बैठक को केरल विधानसभा चुनावों से पहले आपसी मतभेद सुलझाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक के बाद थरूर ने कहा, “मेरी पार्टी के दोनों नेताओं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष के साथ हमारी चर्चा हुई। यह एक बहुत अच्छी, रचनात्मक और सकारात्मक बातचीत थी। सब कुछ ठीक है और हम एक ही पेज पर आगे बढ़ रहे हैं।”
हाल के दिनों में थरूर के पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट होने की खबरें सामने आई थीं। बताया गया था कि वह कोच्चि के एक कार्यक्रम में अपने साथ हुए व्यवहार और केरल कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा उन्हें हाशिये पर धकेले जाने की कोशिशों से नाराज थे। पिछले सप्ताह उन्होंने केरल चुनावों की रणनीति से जुड़ी एक अहम बैठक भी छोड़ी थी। इससे पहले, भारत–पाकिस्तान संबंधों और पहलगाम हमले के बाद कूटनीतिक पहल पर उनकी टिप्पणियां कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग मानी गई थीं, जिस पर पार्टी के भीतर विवाद भी हुआ था।
इन तमाम अटकलों के बीच थरूर के ताजा बयान को कांग्रेस नेतृत्व और केरल इकाई के लिए एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।
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