उन्होंने कहा कि शांति वार्ता में पाकिस्तान का कद तभी माना जा सकता है जब यह शांति वार्ता कामयाब हो जाए और वह अहम भूमिका निभा पाए। उन्होंने कहा कि नोबल पुरस्कार की बात अभी दूर है।
सैय्यद मोहसिन तकवी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि पाकिस्तान के कद में बढ़ोतरी की बात तभी की जा सकती है जब यह शांति वार्ता सफल हो और उसमें पाकिस्तान कोई ठोस और प्रभावी भूमिका निभा सके। फिलहाल, यह कहना जल्दबाजी होगा और आने वाला समय ही तय करेगा कि इस पहल का क्या परिणाम निकलता है।
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय शांति वार्ताओं में केवल मेजबानी करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि वास्तविक भूमिका उस देश की होती है, जो समाधान निकालता है। वर्तमान स्थिति में पाकिस्तान की भूमिका सीमित नजर आ रही है और अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वह इस प्रक्रिया में कितना प्रभाव डाल पाएगा।
नोबेल पुरस्कार से जुड़े सवाल पर मौलाना सैय्यद मोहसिन तकवी ने कहा कि इस तरह की चर्चा करना अभी बहुत जल्दबाजी होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि नोबेल पुरस्कार जैसी प्रतिष्ठित मान्यता के लिए किसी देश की निर्णायक और प्रभावशाली भूमिका जरूरी होती है, जो अभी इस परिदृश्य में दिखाई नहीं दे रही है, इसलिए यह कहना मुश्किल है कि पाकिस्तान को इस पहल के लिए ऐसा कोई अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल पाएगा।
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