सुप्रीम कोर्ट ने ओवैसी की पार्टी का पंजीकरण रद्द करने की याचिका खारिज की!

​ सुप्रीम कोर्ट में तिरुपति नरसिम्हा मुरारी नामक व्यक्ति ने याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने ओवैसी की पार्टी का पंजीकरण रद्द करने की याचिका खारिज की!

supreme-court-news-updates-plea-seeking-to-de-register-Asaduddin-Owaisi-led-AIMIM!

सुप्रीम कोर्ट ने एआईएमआईएम (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) पार्टी का पंजीकरण रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। यह याचिका पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयानों और पार्टी की कथित ‘सांप्रदायिक गतिविधियों’ को आधार बनाकर दाखिल की गई थी।
याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि एआईएमआईएम की गतिविधियाँ संविधान के सेक्युलर मूल्यों के खिलाफ हैं और यह पार्टी धार्मिक आधार पर लोगों को भड़काने का काम कर रही है। इस आधार पर याचिका में पार्टी का पंजीकरण रद्द करने की मांग की गई थी।सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने साफ किया कि केवल राजनीतिक असहमति या विचारधारा के आधार पर किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा,

“यह चुनाव आयोग का क्षेत्राधिकार है कि वह किसी पार्टी के पंजीकरण की समीक्षा करे। ऐसे मामलों में अदालत सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती जब तक कि कोई ठोस कानूनी आधार न हो।”

ओवैसी ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और कहा कि उनके खिलाफ बार-बार इस तरह की याचिकाएं सिर्फ राजनीतिक बदले की भावना से दाखिल की जाती हैं। उन्होंने कहा, “हम भारतीय संविधान के दायरे में रहकर राजनीति करते हैं। न्यायपालिका ने आज फिर लोकतंत्र को मजबूत किया है।”

चुनाव आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कोई पार्टी कानूनी रूप से पंजीकृत है और उसके खिलाफ कोई आपराधिक या संवैधानिक उल्लंघन साबित नहीं होता, तब तक वह सक्रिय रह सकती है।

यह मामला भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में राजनीतिक दलों की स्वायत्तता और संविधान के दायरे में कार्य करने के अधिकार से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक विचारधारा का सम्मान देश के लोकतांत्रिक मूल्यों का हिस्सा है।

 
​यह भी पढ़ें-

छांगुर ने नाती की सगाई नीतू की बेटी से कराई, सबीहा नाम रखकर मांगा 5 करोड़ दहेज!

Exit mobile version