प्रोथोम अलो ने तौहीद हुसैन के हवाले से कहा, “यात्रा का एजेंडा अभी तय नहीं हुआ है। उम्मीद है कि जल्द ही इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा।”
इससे पहले अप्रैल में पाकिस्तान की विदेश सचिव अमना बलोच ढाका आई थीं, जहां 15 वर्षों के अंतराल के बाद विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) आयोजित किए गए थे।
उस यात्रा के दौरान बांग्लादेश ने पाकिस्तान से 1971 से पहले के अविभाजित पाकिस्तान की संपत्ति में अपने उचित हिस्से के रूप में 4.32 अरब डॉलर के वित्तीय दावे को दोहराया था। इसके साथ ही मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए नरसंहार के लिए औपचारिक माफी की भी मांग की गई थी।
बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कारण इशाक डार को उस समय अपनी प्रस्तावित ढाका यात्रा रद्द करनी पड़ी थी।
पिछले 15 वर्षों में अवामी लीग सरकार के कार्यकाल के दौरान ढाका और इस्लामाबाद के बीच संबंध अक्सर तनावपूर्ण रहे हैं। इसके पीछे प्रमुख कारणों में 1971 के युद्ध अपराधों की सुनवाई, पाकिस्तान की भूमिका पर विवाद और क्षेत्रीय राजनीति शामिल हैं।
हालांकि, अगस्त 2024 में अंतरिम सरकार के गठन और यूनुस के नेतृत्व में सत्ता परिवर्तन के बाद दोनों देशों के रिश्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
पिछले साल संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान डॉ. यूनुस और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच हुई मुलाकात में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर सहमति जताई थी।
जनवरी में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के चार वरिष्ठ अधिकारी ढाका आए थे। यह बांग्लादेश-पाकिस्तान संबंधों में एक रणनीतिक मोड़ माना जा रहा है।
इसके अलावा, बांग्लादेश की सशस्त्र बल डिवीजन के प्रमुख स्टाफ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल एस. एम. कमरुल हसन के नेतृत्व में एक सैन्य प्रतिनिधिमंडल 13 से 18 जनवरी तक पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय का दौरा कर चुका है। वहां प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी सेना, नौसेना और वायुसेना प्रमुखों से मुलाकात की थी।
1971 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुए नरसंहार और ऐतिहासिक कटुता के बावजूद अब दोनों देशों के बीच रिश्तों में नई शुरुआत के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
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