तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने मंगलवार (20 जनवरी)को विधानसभा सत्र के दौरान राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए अभिभाषण को पढ़ने से इनकार करते हुए सदन से वॉकआउट कर लिया। राज्य सरकार द्वारा लिखकर दिए अभिभाषण को लेकर राज्यपाल ने आरोप लगाया कि इसमें गलतियां और अपुष्ट दावे हैं। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें राज्यपाल को राष्ट्रगान के दौरान उपस्थित देखा गया, जबकि राष्ट्रगान समाप्त होते ही वे सदन से बाहर निकलते नजर आए।
घटना के बाद राजभवन (लोक भवन) की ओर से 13 बिंदुओं में विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया गया। इसमें दावा किया गया कि विधानसभा के भीतर राज्यपाल का माइक्रोफोन लगातार बंद किया गया और उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। बयान में कहा गया, “इस भाषण में कई अपुष्ट दावे और भ्रामक वक्तव्य शामिल हैं। जनता को परेशान करने वाले कई अहम मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।”
राजभवन के बयान में विशेष रूप से डीएमके सरकार के निवेश संबंधी दावों पर सवाल उठाए गए। राज्य सरकार के इस दावे को कि तमिलनाडु में 12 करोड़ रुपये से अधिक का भारी निवेश आया है, जो की सच्चाई से कोसों दूर बताया गया है। बयान के अनुसार, “वास्तविक निवेश इसका केवल एक छोटा हिस्सा है। संभावित निवेशकों के साथ किए गए कई समझौते सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।”
Due respect must be given to the National Anthem in the Assembly! 🇮🇳
Governor shri. RN Ravi walked out without reading his address because the government did not accept his request that the National Anthem should be played after the Tamil Thai Valthu. pic.twitter.com/xIHy4XjCis
— Sk Palanikumar Yadav (@p_nikumar) January 20, 2026
निवेश के आंकड़ों का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि तमिलनाडु निवेशकों के लिए अनु-आकर्षक होता जा रहा है। “चार साल पहले तक तमिलनाडु राज्यों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त करने में चौथे स्थान पर था। आज वह छठे स्थान पर बने रहने के लिए संघर्ष कर रहा है,” बयान में उल्लेख किया गया।
इसके अलावा, महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने का भी आरोप लगाया गया। राजभवन के अनुसार, राज्य में अपराध के मामलों में तेज वृद्धि देखी जा रही है, जिसमें पॉक्सो अधिनियम के तहत बलात्कार के मामलों में 55 प्रतिशत से अधिक और महिलाओं से छेड़छाड़ के मामलों में 33 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी शामिल है। बयान में कहा गया, “दलितों के खिलाफ अत्याचार और दलित महिलाओं के साथ यौन हिंसा में तेज वृद्धि हो रही है। हालांकि, इन गंभीर मुद्दों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है।”
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर तमिलनाडु सरकार और राज्यपाल के बीच जारी टकराव को उजागर कर दिया है। विपक्षी दलों ने इसे संवैधानिक मर्यादाओं और परंपराओं से जुड़ा मामला बताते हुए प्रतिक्रिया दी है। विधानसभा सत्र के दौरान हुए इस वॉकआउट को लेकर राज्य की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है।
यह भी पढ़ें:
तमिलनाडु में निपाह वायरस का खौफ, सतर्कता के साथ तैयारियां बढ़ाई गईं!
पाकिस्तान का बांग्लादेश को समर्थन, टी20 वर्ल्ड कप तैयारी पर लगाई रोक!
बसंत पंचमी पर इस साल विवाह के लिए नहीं है शुभ मुहूर्त, जानिए वजह!
पीएम मोदी बोले: बंगाल में बदलाव के लिए भाई-बहन बुलंद कर रहे नारे!



