तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने चेन्नई के किलपॉक क्षेत्र में स्थित वाडेल्स रोड का नाम बदलकर “आर्चबिशप एज़रा सारगुनम रोड” रख दिया है। इस निर्णय को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि एज़रा सारगुनम को हिंदू धर्म विरोधी प्रचार, विवादास्पद बयानों और जबरन धर्मांतरण के लिए जाना जाता है। इस नामकरण समारोह में डीएमके मंत्री नेहरू, एचआर एंड सीई मंत्री सेकारबाबू, चेन्नई की मेयर आर. प्रिया और डीएमके विधायक इनिगो इरुधयाराज मौजूद थे। लेकिन इस कदम की व्यापक आलोचना हो रही है, खासकर सोशल मीडिया पर, जहां कई लोगों ने सारगुनम के अतीत के बयानों को लेकर नाराजगी जताई है।
एज़रा सारगुनम एक ईसाई धर्मप्रचारक और Evangelical Church of India (ECI) के पूर्व प्रमुख था। हाल ही में 86 वर्ष की उम्र में ईसाई प्रचारक का निधन हुआ। वह खुद को धर्मगुरु से ज्यादा एक धर्मांतरण मिशनरी के रूप में प्रस्तुत किया करता था। 2005 तक ईसाई धर्मप्रचारक ने भारत में 2,000 से अधिक चर्चों की स्थापना करवाई और 2056 तक 1 लाख चर्च स्थापित करने का लक्ष्य तय किया था। लेकिनएजरा की पहचान सिर्फ धार्मिक नहीं, राजनीतिक और सांप्रदायिक विवादों से भी जुड़ी रही। वह लंबे समय तक डीएमके का करीबी रहा और उसके भाषणों में अक्सर हिंदू धर्म, हिंदू संस्कृति और यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी खुले हमले देखे जाते थे।
"There is nothing called as a Hindu Religion, Punch them in their face couple of times, make them bleed and help them understand the truth" – Bishop Ezra Sargunam, now you know why M.K.Stalin wants to uproot Sanatana Dharma. pic.twitter.com/L8lwwZMVop
— Vishwatma 🇮🇳 ( மோடியின் குடும்பம் ) (@HLKodo) June 12, 2019
2018 में एक भाषण में, सारगुनम ने इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन SDPI से आग्रह किया कि वह हिंदुओं का “जवाब दें” — कट्टरपंथी प्रचारक एज़रा का यह बयान पीएमके कार्यकर्ता रामलिंगम की हत्या के बाद आया, जिन्होंने जबरन धर्मांतरण का विरोध किया था। एज़रा ने खुलेआम ईसाइयों से कहा था कि अगर हिंदू धर्म की आलोचना स्वीकार नहीं करते, तो “उनके चेहरे पर तब तक मुक्का मारो जब तक खून न निकल जाए।”
सारगुनम ने कई बार हिंदू धर्म को “कृत्रिम धर्म” बताया और कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक सुविधा के लिए गढ़ा गया विचार है। उसके अनुसार, हिंदू धर्म का कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं है, और उसने अपने अनुयायियों से आग्रह किया कि जो लोग इसे धर्म मानते हैं, उन्हें जबरदस्ती चुप कराया जाए।
"There is nothing called as a Hindu Religion, Punch them in their face couple of times, make them bleed and help them understand the truth" – Bishop Ezra Sargunam, now you know why M.K.Stalin wants to uproot Sanatana Dharma. pic.twitter.com/L8lwwZMVop
— Vishwatma 🇮🇳 ( மோடியின் குடும்பம் ) (@HLKodo) June 12, 2019
सारगुनम की आलोचना सिर्फ धार्मिक स्तर पर नहीं रही, बल्कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर लिया। डीएमके नेता भी मौजूदगी की एक सभा में सारगुनम ने कहा था कि “मोदी न तो भगवान से डरता है और न ही जनता से। उसे पारिवारिक जीवन की कठिनाइयों का क्या पता?” साथ ही पीएम मोदी को झूठा आदमी बताते हुए और उनकी तबाही के लिए सामूहिक प्रार्थना भी करवाई।
सारगुनम का जीवन हिंदू धर्म या अन्य विश्वासों को समझने की बजाय उन्हें बदलने की जिद से भरा रहा। उसने एक इंटरव्यू में गर्व से बताया कि कैसे उसके अनुयायी और उसने कुंभ मेले में हिंदू श्रद्धालुओं के बीच ईसाई साहित्य बांटने की कोशिश की, जहाँ लोगों ने उन्हें खदेड़ दिया और पीटा। पर इस घटना से उसने आत्मचिंतन नहीं किया, बल्कि उसका “हिंदुओं को बचाने” का धर्मांतरण अभियान और मजबूत किया।
2000 में सारगुनम तमिलनाडु अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष था। उसने गुजरात में एक कथित चर्च हमले के बाद वहां पहुंचकर तनाव फैलाया। गुजरात सरकार ने तमिलनाडु सरकार से शिकायत की, यह कहते हुए कि सारगुनम स्थानीय ईसाइयों को भड़काने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का काम कर रहा था।
वाडेल्स रोड का नाम बदलकर एज़रा सारगुनम रोड करना केवल एक सड़क का नाम बदलना नहीं है, बल्कि यह उन विवादास्पद विचारों और नीतियों को वैधता देना है, जो देश की धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक समरसता के खिलाफ जाती हैं। सरकार का यह निर्णय हिंदू समुदाय की भावनाओं के साथ सीधे टकराव में आता है और यह सवाल उठाता है कि क्या राजनीति धार्मिक कट्टरता और सामाजिक उकसावे को बढ़ावा दे रही है?
विरोध करने वालों का कहना है, एक ऐसे व्यक्ति को सार्वजनिक सम्मान देना, जिसने खुलेआम हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को प्रोत्साहित किया, किसी भी धर्मनिरपेक्ष और न्यायप्रिय लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
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