समाजवादी पार्टी (सपा) की विधायक रागिनी सोनकर ने यूपी विधानसभा में पेश किए गए बजट को आधारहीन करार दिया है। लखनऊ में आईएएनएस से बातचीत में रागिनी सोनकर ने कहा कि कल भी इसकी चर्चा हो रही थी और एक्सरसाइज भी किया गया था। बजट ऐसा होना चाहिए कि अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति भी इसका लाभ उठा सके। लेकिन, जो बजट पेश किया गया है, वह पूरी तरह बेसलेस है।
सपा विधायक ने कहा कि आकार भले ही बड़ा हो, यह केंद्रीय बजट की तरह ही दिखावटी बजट है। कृषि क्षेत्र में कोई खास लाभ नहीं दिखाई दे रहा है। गरीब परिवारों की शादी के लिए जो वादा किया गया था, उसमें जो क्राइटेरिया तय किए गए हैं, उनसे हमारे गरीबों तक लाभ पहुंच पाना मुश्किल है। अभी तक हमारी बेटियों को स्कूटी नहीं मिली है।
इस बार भी स्कूटी देने की बात की गई है। मैंने शिक्षा मित्रों और रसोइयों की समस्या पहले भी उठाई थी। पिछले साल कैशलेस सुविधा की बात हुई थी, बड़े-बड़े विज्ञापन निकाले गए थे, लेकिन इस बार भी वही पुरानी बात दोहराई गई है। किसी भी व्यक्ति को वास्तविक लाभ पहुंचाने वाली कोई स्कीम इस बजट में नहीं है।
सपा विधायक ने कहा कि चिकित्सा में भले ही बजट में बढ़ोतरी दिखाई गई हो, हकीकत यह है कि आजकल किडनी फेलियर की समस्या से लोग रोज जूझ रहे हैं और डायलिसिस बेड बढ़ाने की कोई बात नहीं हुई। कैंसर के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन कीमोथेरेपी सेंटरों की स्थिति सुधारने या सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टरों की जिला स्तर पर नियुक्ति की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।
इमरजेंसी में सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षा के जो वादे किए जा रहे हैं, वे सब कागजों तक सीमित हैं। आज सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं और गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराना मुश्किल होता जा रहा है। यह बजट दूसरे देशों और विदेशी निवेशकों को दिखाने वाला बजट है, जनता के लिए यह बजट निरर्थक साबित हो रहा है।
समाजवादी पार्टी के विधायक कमाल अख्तर ने बजट पर कहा कि भारी भरकम बजट तो हमेशा से आया है। पिछला भी भारी था और यह उससे भी भारी भरकम है। हर बजट में एक ही चीज कॉमन है। सरकार इस बार 9 लाख करोड़ का बजट लाई है, लेकिन इस बजट के अंदर सरकार ने किसान, नौजवान, पीडीए के लोगों के लिए कुछ भी नहीं रखा है। यह इन्हें निराश करने वाला बजट है।
कमाल अख्तर ने कहा कि महिलाओं को जहां तक एक लाख रुपए देने की बात है, तो आप बताएं कि यूपी में हिंदू हो, मुस्लिम हो या कोई भी हो, वे अपनी गरीबी को छिपाते हैं। सरकार ने जो सामूहिक विवाह योजना बनाई है, वह लोगों को बेइज्जत करने के लिए बनाई है।
