नितिन नवीन ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “भाजपा का विशाल वटवृक्ष आप देख रहे हैं, ये हमारे कार्यकर्ताओं की मेहनत का फल है। 1980 में स्थापित भाजपा को 1984 के चुनाव में सिर्फ दो सीटें मिली थीं। आज यह विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इसका श्रेय भाजपा के बूथ कार्यकर्ताओं को जाता है, जो सबसे निचले स्तर पर काम करते हुए कमल खिलाने का संकल्प पूरा करते हैं।”
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, “डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’, पंडित दीनदयाल उपाध्याय के “अंत्योदय” और अटल बिहारी वाजपेयी के सुशासन के भाव को आत्मसात करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आधुनिक भारत के निर्माण में लगे हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में विकास की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के संकल्प को पूरा किया गया। कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत का तिरंगा लहराता रहे, इस संकल्प को पूरा किया गया।”
नितिन नवीन ने कहा, मैं यहां उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं से आने वाले वर्षों में और अधिक संघर्ष करने का आह्वान करने आया हूं। 2047 तक विकसित भारत की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संकल्पना को साकार करने के लिए हम सभी को अपना पुरुषार्थ करना होगा। समर्पण और संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने कहा, “जो लोग पूछते हैं कि हमें पश्चिम बंगाल में किस प्रकार जीत मिली, मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि इस जीत के पीछे हमारे विचार हैं, हमारा नेतृत्व है और हमारे कार्यकर्ताओं का संघर्ष है। जब हमने सिर्फ दो सीटें जीती थीं, तब भी हमने डटे रहने का रास्ता चुना।
उन्होंने कहा, “आज भाजपा 22 राज्यों में सत्ता में है। हम कांग्रेस पार्टी की कमजोरियों को अपने चुनाव प्रचार का आधार नहीं बनाएंगे। हम अपनी उपलब्धियों के बल पर चुनाव लड़ेंगे। हमारी सरकार की खासियत यह है कि हम अपने वादों को पूरा करते हैं।
नितिन नवीन ने कहा, “मैं मजलिस, कांग्रेस और बीआरएस की ओर से खेले जा रहे खेल से वाकिफ हूं। मैं यह साफ करना चाहता हूं कि इन पार्टियों ने धर्म के आधार पर आरक्षण देने का काम किया है। भाजपा इसका विरोध करती है। जब यहां (तेलंगाना) हमारी सरकार सत्ता में आएगी, तो हम धर्म के आधार पर दिए जाने वाले आरक्षण को खत्म कर देंगे।”
भाजपा अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “कुछ लोग पूछते हैं कि क्या बदला? पूरे विश्व में इस देश के तिरंगे का सम्मान बदल गया है। कल तक पाकिस्तान का झंडा कश्मीर के लाल चौक पर लहरा दिया जाता था और दिल्ली में बैठी कांग्रेस सरकार मौन रहती थी।
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