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जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ डोनाल्ड ट्रंप ने मोदी को दिया रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति प्रयासों का श्रेय!

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मंगलवार (16 सितंबर, अमेरिकिन समय) को हुई फोन बातचीत ने भारत-अमेरिका संबंधों में सकारात्मक संभावनाएं पैदा कर दी है। 16 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप ने मोदी को उनके 75वें जन्मदिन की अग्रिम शुभकामनाएं दीं और रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति प्रयासों के लिए उनका आभार जताया।

मोदी ने इस बातचीत को मेरे मित्र के साथ एक गर्मजोशी भरा संवाद बताते हुए कहा कि वे भारत-अमेरिका व्यापक और वैश्विक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वहीं, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा,“अभी-अभी अपने मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शानदार बातचीत हुई। मैंने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। वे बेहतरीन काम कर रहे हैं। नरेंद्र: रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने में सहयोग के लिए धन्यवाद!”

दरअसल, बीते कुछ महीनों से भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव रहा है। वाशिंगटन ने भारतीय आयातों पर 50% टैरिफ लगाया था, जिसका कारण नई दिल्ली का सस्ता रूसी तेल खरीदना बताया गया। इसके चलते दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता ठप हो गई थी। यही कारण था कि अगस्त 2025 में मोदी ने तौर पर ट्रंप के चार फोन कॉल्स ठुकरा दिए, जिसे असाधारण राजनयिक संदेश माना गया।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत इस बात से नाराज था कि ट्रंप निजी बातचीत को राजनीतिक नाटक में बदल सकते हैं। खासतौर पर पाकिस्तान को लेकर ट्रंप के बयानों ने नई दिल्ली को खासी आपत्ति दी थी।

अब मोदी का ट्रंप का कॉल स्वीकार करना विशेषज्ञों के मुताबिक एक संकेत है कि भारत बिना झुके बातचीत को फिर से आगे बढ़ाना चाहता है। यह कॉल ऐसे समय में आया जब इस महीने की शुरुआत में नई दिल्ली में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताएं फिर शुरू हुईं। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश अग्रवाल ने किया, जबकि अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व ब्रेंडन लिंच, असिस्टेंट यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव, ने किया।

बातचीत में कृषि आयात, डेयरी एक्सेस और कमोडिटी टैरिफ जैसे मुद्दों पर समाधान तलाशने और लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को फिर से जीवित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

अमेरिका की प्राथमिकता भारत की रूसी ऊर्जा पर निर्भरता को कम करना है, जबकि भारत अपने रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा और दंडात्मक टैरिफ से राहत चाहता है। मोदी-ट्रंप कॉल ने दोनों पक्षों को राजनीतिक रूप से लचीला माहौल दिया है, ताकि वे समझौते की ओर बढ़ सकें, बिना इसे झुकाव के रूप में पेश किए।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस फोन कॉल ने यह संकेत दिया कि व्यक्तिगत कूटनीति अब भी रिश्तों को संभालने में अहम भूमिका निभा रही है। चुनावी मौसम में जहां अमेरिका में भारत-अमेरिका संबंध ट्रंप के कैंपेन का हिस्सा बन सकते हैं, वहीं भारत ने भी यह जताने की कोशिश की है कि वह अपने हितों के साथ समझौता किए बिना संवाद बनाए रखना चाहता है।

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