अमेरिका-ईयू व्यापार समझौता: इंडोनीशिया के बाद यूरोप को झुकाया !

अमेरिका से ख़रीदिनी होगी 750 अरब डॉलर की ऊर्जा, और करना होगा 600 अरब डॉलर का निवेश।

अमेरिका-ईयू व्यापार समझौता: इंडोनीशिया के बाद यूरोप को झुकाया !

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अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक अहम व्यापार समझौता हुआ है, जिससे संभावित ट्रांसअटलांटिक ट्रेड वॉर टल गया है। यह घोषणा पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्कॉटलैंड स्थित ट्रंप के टर्नबेरी गोल्फ रिज़ॉर्ट में की। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत अमेरिका में यूरोपीय संघ के अधिकतर उत्पादों पर 15% आयात शुल्क लगाया जाएगा, जो पहले 30% तक बढ़ाने की धमकी दी गई थी। ट्रंप ने इसे दोनों पक्षों के लिए बेहतरीन सौदा बताया, जबकि वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यह स्थिरता और पूर्वानुमेयता लाएगा। इससे पहले डोनाल्ड ट्रम्प ने इसी आयात शुल्क की तलावरतले इंडोनेशिया को झुकाया था।

यूरोपियन यूनियन खरीदेगा अमेरिका से $750 अरब की ऊर्जा:

इस डील का सबसे अहम पहलू यह है कि यूरोपीय संघ अगले तीन वर्षों में अमेरिका से 750 अरब डॉलर की ऊर्जा खरीदेगा। इससे पहले इंडोनेशिया के साथ व्यापार समझौते में अमेरिका से 15 अरब डॉलर की ऊर्जा खरीदना तय हुआ है। हालांकि यूरोपीय यूनियन हर साल 250 अरब डॉलर की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG), कच्चा तेल और न्यूक्लियर फ्यूल खरीदने जा रहा है। इस कदम का उद्देश्य रूस पर यूरोप की ऊर्जा निर्भरता को कम करना है। ट्रंप ने कहा, “यह सभी के लिए फायदेमंद सौदा है। इससे अमेरिका के ऊर्जा निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और ईयू को एक स्थिर, गैर-रूसी आपूर्ति मिलेगी।”

समझौते के तहत ईयू अमेरिका में 600 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश करेगा। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह निवेश किन क्षेत्रों में और किस समयसीमा में होगा। जबकि ट्रंप ने दावा किया कि “अमेरिकी बाज़ार अब यूरोपीय देशों के लिए पूरी तरह खुला है,” हालांकि यूरोप पहले से ही हर साल अमेरिका से 400 अरब डॉलर से अधिक के उत्पाद आयात करता है। विश्लेषकों का मानना है कि इसी तरह के निवेश प्रावधान पहले अमेरिका-जापान डील में भी विवादास्पद रहे हैं।

इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ अमेरिकी रक्षा कंपनियों से विशाल मात्रा में सैन्य उपकरण खरीदेगा। यह ईयू की पारंपरिक स्थानीय रक्षा उत्पादन नीति से बड़ा बदलाव है। जबकि यूरोपीय संघ में स्थानीय रक्षा उत्पाद अमेरिकी रक्षा उत्पादों की गुणवत्ता और क़ीमत के पैमाने पर टक्कर देते आए है। देखा जाए तो इस पर कोई निश्चित राशि घोषित नहीं की गई, लेकिन ट्रंप ने इसे डील का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। यह अमेरिकी रक्षा उद्योग के लिए एक बड़ा अवसर है, लेकिन यूरोपीय देशों में आंतरिक बहस को भी जन्म दे सकता है।

अधिकांश यूरोपीय उत्पादों जैसे कार, फार्मा, सेमीकंडक्टर्स पर अब 15% आयात शुल्क लगेगा, जो पहले 1.2% के करीब था। यह दर पहले घोषित 30% शुल्क से काफी कम है, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच 975 अरब डॉलर के व्यापार को झटका लग सकता था। इसके साथ ही कुछ वस्तुओं — विमान, पुर्जे, कुछ रसायन, जेनेरिक दवाएं और कृषि उत्पाद — पर शून्य प्रतिशत शुल्क लागू रहेगा। हालांकि सामान्य टैरिफ घटाए गए हैं, लेकिन अमेरिका ने यूरोपीय संघ के स्टील और एल्युमिनियम पर 50% शुल्क बनाए रखा है। वॉन डेर लेयेन ने संकेत दिया कि भविष्य में इन पर बातचीत हो सकती है, लेकिन ट्रंप ने साफ किया, “स्टील जैसा चल रहा है, वैसा ही चलेगा।” इस फैसले से यूरोपीय स्टील निर्यातकों को नुकसान हो सकता है और अमेरिकी उद्योगों के लिए लागत भी बढ़ सकती है।

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