अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान तनाव को लेकर बड़ा दावा किया है। अपने दूसरे कार्यकाल के पहले स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने पहले 10 महीनों में आठ युद्ध समाप्त कराए, जिनमें भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित “न्यूक्लियर वॉर” भी शामिल था।
ट्रंप ने दावा किया, “अपने पहले 10 महीनों में मैंने आठ युद्ध समाप्त किए… पाकिस्तान और भारत के बीच परमाणु युद्ध हो जाता। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर मेरी भागीदारी न होती तो 3.5 करोड़ लोग मारे जाते।” यह पहला अवसर है जब ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यह कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें संभावित 3.5 करोड़ मौतों की चेतावनी दी थी। हालांकि उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई नया साक्ष्य पेश नहीं किया।
ट्रंप ने जिन संघर्षों को सुलझाने का दावा किया, उनमें इजरायल-हमास, इजरायल-ईरान, मिस्र-इथियोपिया, भारत-पाकिस्तान, सर्बिया-कोसोवो, रवांडा-डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, आर्मेनिया-अजरबैजान और कंबोडिया-थाईलैंड शामिल हैं।
बता दें की, भारत सरकार पहले भी ट्रंप के मध्यस्थता संबंधी दावे को खारिज कर चुकी है। जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर से ट्रंप की भूमिका पर सवाल पूछा गया था, तो उन्होंने टिप्पणी की थी कि अमेरिका, तो “संयुक्त राज्य अमेरिका में था।”
भारत ने लगातार यह रुख दोहराया है कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं हुई। विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, पाकिस्तान के DGMO ने भारतीय समकक्ष से सैन्य हॉटलाइन पर संपर्क कर कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया था, जिसके बाद आपसी सहमति से युद्धबंदी की गई।
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाकर निर्दयता से मारा गया। इसी के जवाब में भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया । इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान द्वारा कब्जाए कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया । चार दिनों तक चली सैन्य कार्रवाई के बाद संघर्षविराम लागू हुआ।
ट्रंप के ताजा बयान को पाकिस्तान के लिए असहज स्थिति के रूप में देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष इस्लामाबाद ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था, यह कहते हुए कि उनकी “राजनयिक हस्तक्षेप” ने युद्ध रोकने में मदद की।
हालांकि भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट संघर्षविराम द्विपक्षीय सैन्य संपर्क के बाद हुआ और किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं थी। ट्रंप का नया दावा ऐसे समय आया है जब क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरणों पर वैश्विक नजर बनी हुई है।
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