उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन – SIR) के तहत मंगलवार (6 जनवरी) को भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की। इस ड्राफ्ट सूची में उत्तर प्रदेश से कुल 2.97 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो अब तक किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में SIR के दौरान की गई सबसे बड़ी कटौती मानी जा रही है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, हटाए गए नाम कुल मतदाताओं का लगभग 18.70 प्रतिशत हैं। यह कटौती मुख्य रूप से मतदाताओं की मृत्यु, स्थायी पलायन या एक से अधिक स्थानों पर पंजीकरण के कारण की गई है। इसके अलावा, लगभग 8 प्रतिशत यानी करीब 1.4 करोड़ मतदाता ऐसे हैं, जिनकी अब तक मैपिंग नहीं हो सकी है। इन मतदाताओं को निर्वाचन आयोग की ओर से नोटिस भेजे जाएंगे।
ड्राफ्ट मतदाता सूची को लेकर मीडिया को जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने बताया कि राज्य की मौजूदा ड्राफ्ट सूची में कुल 12 करोड़ 55 लाख 56 हजार 25 मतदाताओं के नाम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से 2.17 करोड़ मतदाता (14.06 प्रतिशत) या तो पलायन कर चुके हैं या गणना (एन्यूमरेशन) चरण के दौरान अनुपस्थित पाए गए। इसके अलावा, 46.23 लाख मतदाता (2.99 प्रतिशत) मृत पाए गए, जबकि 25.57 लाख मतदाता (1.65 प्रतिशत) एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत पाए गए।
VIDEO | Lucknow: “2.97 crore names deleted from draft electoral roll in Uttar Pradesh”, said CEO Navdeep Rinwa, during a press conference. #SIR #UttarPradesh
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— Press Trust of India (@PTI_News) January 6, 2026
CEO नवदीप रिणवा ने कहा, “उत्तर प्रदेश में लगभग 91% मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है। यह आंकड़ा केवल 12.55 करोड़ मतदाताओं के संदर्भ में है। करीब 8% यानी 1.4 करोड़ मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पाई है। ऐसे लोगों को नोटिस भेजे जाएंगे। नोटिस की प्रक्रिया 6 जनवरी से शुरू हो गई है। नोटिस में उन दस्तावेजों की सूची होगी, जिन्हें वे मार्च में जारी होने वाली अंतिम सूची में नाम शामिल कराने के लिए प्रमाण के रूप में जमा कर सकते हैं।”
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी बताया कि ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद राजनीतिक दलों के साथ बैठकें की गई हैं और उनसे अपने-अपने समर्थकों के नामों की जांच करने को कहा गया है। उन्होंने कहा, “हमने आज राजनीतिक दलों के साथ बैठक की और उनसे कहा कि उनका पहला काम मतदाताओं के नामों की जांच करना है। हर मतदाता को भी यह जांच करनी चाहिए। अगर किसी का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, तो उसे फॉर्म-6 भरकर दावा करना होगा। सुधार के लिए भी आवेदन किया जा सकता है।” उन्होंने यह भी जानकारी दी कि बूथ लेवल अधिकारी (BLO) 11 जनवरी को अपने-अपने क्षेत्रों में ड्राफ्ट सूची का पाठ करेंगे।
ड्राफ्ट मतदाता सूची को लेकर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 6 जनवरी से 6 फरवरी तक तय की गई है। दावों और आपत्तियों का निस्तारण 26 जनवरी से शुरू होकर 27 फरवरी तक चलेगा। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को प्रकाशित की जाएगी।
CEO रिणवा ने बताया कि 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले या जिनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 से पहले की है, वे नए सिरे से मतदाता सूची में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले भी फॉर्म-6 भर सकते हैं, हालांकि उनके नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे और 18 वर्ष पूरे होने के बाद ही जोड़े जाएंगे।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में SIR की प्रक्रिया 27 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई थी। इसका पहला चरण, यानी एन्यूमरेशन चरण, 4 नवंबर 2025 से शुरू होकर मूल रूप से 11 दिसंबर 2025 तक चलना था। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुरोध पर इसकी अवधि 26 दिसंबर 2025 तक बढ़ाई गई। राज्य की विशाल आबादी को देखते हुए इस अभियान में 7 लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारी लगाए गए। इसमें राज्य के 75 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारी, 403 निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, 2,042 सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, 1,62,486 बूथ लेवल अधिकारी और 5,76,611 बूथ लेवल एजेंट शामिल रहे।
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