मुख्यमंत्री ने ‘पीएम कृषि सिंचाई योजना’ की गाइडलाइंस में लिफ्ट इरिगेशन को सम्मिलित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के कारण वर्तमान में पर्वतीय क्षेत्र का मात्र 10 प्रतिशत भूभाग ही सिंचित हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में उत्तराखंड में पर्वतीय महाकुंभ के रूप में प्रसिद्ध ‘मां नंदा राजजात यात्रा’ तथा वर्ष 2027 में हरिद्वार में ‘कुंभ’ का आयोजन होना है। उन्होंने इन दोनों आयोजनों को ‘भव्य एवं दिव्य’ बनाने के लिए सहयोग मांगा। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण में ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ की महत्वपूर्ण भूमिका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की जीडीपी में प्राथमिक सेक्टर का योगदान जहां मात्र 9.3 प्रतिशत है, वहीं इस कार्य में लगभग 45 प्रतिशत आबादी लगी है। इस समस्या को देखते हुए हमने प्रदेश के काश्तकारों को ‘लो वैल्यू एग्रीकल्चर’ की बजाय ‘हाई वैल्यू एग्रीकल्चर’ अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ किया है, जिनमें एप्पल मिशन, कीवी मिशन, ड्रैगन फ्रूट मिशन, मिलेट मिशन तथा सगंध कृषि को प्रोत्साहन शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के सशक्त नेतृत्व में भारत वर्ष 2047 तक ‘विकसित एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र’ बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस संकल्प को पूर्ण करने के लिए उत्तराखंड सरकार भी दृढ़ संकल्पित होकर वित्तीय प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन को ध्यान में रखते हुए कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों को प्रधानमंत्री के नेट जीरो के विजन को ध्यान में रखते हुए ‘ग्रीन गेम्स’ की थीम पर आयोजित किया गया। इन खेलों में ‘इलैक्ट्रॉनिक्स वेस्ट’ सामग्री की ‘रीसाइक्लिंग’ से 4,000 पदक तैयार किए गए।
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