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जिन्ना से लेकर इंदिरा गांधी तक पीएम मोदी ने याद दिलवाया ‘वंदे मातरम्’ इतिहास; तिलमिलाई कांग्रेस

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लोकसभा में सोमवार(8 दिसंबर)को ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर शुरू हुई विशेष चर्चा एक तीखे राजनीतिक टकराव में बदल गई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के इतिहास, उसके निर्णयों और उसकी विचारधारा पर सीधे और आक्रामक रूप से प्रश्न उठाए। पीएम मोदी ने नेहरू, जिन्ना, आपातकाल और विभाजनकाल की पृष्ठभूमि का विस्तार से उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कई बार तुष्टिकरण की राजनीति के दबाव में राष्ट्रीय गीत के साथ  विश्वासघात किया। उनकी टिप्पणी पर कांग्रेस तिलमिला उठी और दोनों पक्षों के बीच बहस का स्वर तेजी से राजनीतिक कटुता में बदल गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की यात्रा भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के उतार–चढ़ाव, जनआंदोलनों और राष्ट्रीय एकता की भावना से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि जब इस गीत के 50 वर्ष पूरे हुए, तब देश गुलामी की जंजीरों में बंधा था; और जब 100 वर्ष पूरे हुए, तब आपातकाल के “दमनकारी अध्याय” में संविधान को दबा दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह वही समय था जब देशभक्ति की आवाज़ उठाने वालों को जेल में डाला गया और ‘वंदे मातरम्’ की भावना को राजनीतिक असहिष्णुता ने दबा दिया। मोदी ने कहा कि बंगाल विभाजन के समय यह नारा अंग्रेजों के खिलाफ भारतीय जनता की सबसे बड़ी शक्ति बन गया था इतना कि ब्रिटिश शासन ने इसे गाने पर सजा तक तय कर दी थी।

पीएम मोदी ने अपने बयान को कांग्रेस नेतृत्व और उनके ऐतिहासिक फैसलों की आलोचना के साथ जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि जब जिन्ना ने 1937 में ‘वंदे मातरम्’ का विरोध किया, तब पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सुभाष चंद्र बोस को लिखे पत्र में कहा कि यह गीत मुसलमानों को उकसा सकता है और इसके उपयोग की समीक्षा की जानी चाहिए। मोदी के अनुसार, कांग्रेस ने लीग के दबाव में राष्ट्रीय गीत के टुकड़े कर दिए और देश के सामने इसे सामाजिक समरसता के नाम पर एक समझौते की तरह पेश किया। उन्होंने इसे “राष्ट्रीय आत्मा के साथ विश्वासघात” बताया और कहा कि इसी झुकाव ने आगे चलकर विभाजन जैसे दर्दनाक परिणामों की राह बनाई।

प्रधानमंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्वरूप का भी उल्लेख किया और कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की यह रचना स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना बन गई थी। उन्होंने गीत में व्यक्त मातृभूमि के प्रति समर्पण की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि “मां भारती को बेड़ियों से मुक्त कराने की पवित्र पुकार” थी। उन्होंने महात्मा गांधी की 1905 की टिप्पणी का भी हवाला दिया, जिसमें गांधी ने इसे उस समय का राष्ट्रीय गीत बताया था, और प्रश्न उठाया कि फिर बाद में इस गीत को विवादों में क्यों घसीटा गया।

पीएम मोदी के तीखे आरोपों के बाद कांग्रेस की प्रतिक्रिया भी उतनी ही प्रखर रही। सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री पर चर्चा को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ही स्वतंत्रता संग्राम में सबसे पहले ‘वंदे मातरम्’ का उद्घोष किया था और बीजेपी के “राजनीतिक पूर्वजों” का आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं था। गोगोई ने कहा कि भाजपा चाहे जितने भी आरोप लगाए, पंडित नेहरू के योगदान को कम नहीं किया जा सकता।

विशेष चर्चा आगे भी दोनों पक्षों के आरोप–प्रत्यारोप के बीच जारी रहने की संभावना है, लेकिन सोमवार की बहस ने साफ कर दिया कि ‘वंदे मातरम्’ पर आरंभ हुई यह ऐतिहासिक चर्चा राजनीतिक इतिहास की खुरदरी परतों को एक बार फिर सामने ले आई है।

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