पश्चिम बंगाल टीएमसी नेता जयप्रकाश मजूमदार को हाईकोर्ट से जमानत! 

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता जयप्रकाश मजूमदार को बिधाननगर में एक आवासीय फ्लैट पर करीब 14 वर्षों से अवैध रूप से कब्जा करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

पश्चिम बंगाल टीएमसी नेता जयप्रकाश मजूमदार को हाईकोर्ट से जमानत! 

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कलकत्ता हाई कोर्ट ने टीएमसी नेता जय प्रकाश मजूमदार को अंतरिम जमानत दे दी है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अजय कुमार मुखर्जी ने की। एकल पीठ ने कुछ शर्तों के साथ अंतरिम जमानत दी। शर्तों के अनुसार, टीएमसी नेता जय प्रकाश मजूमदार कोलकाता और बिधाननगर नहीं छोड़ सकते। वे फूलबागान क्षेत्र में भी प्रवेश नहीं कर सकते, जहां उनका फ्लैट स्थित है।

गौरतलब है कि 3 जून को पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता जयप्रकाश मजूमदार को बिधाननगर में एक आवासीय फ्लैट पर करीब 14 वर्षों से अवैध रूप से कब्जा करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। बिधाननगर स्थित एई-337 नंबर का यह फ्लैट आरती रायचौधरी का है।

खबरों के अनुसार, जयप्रकाश मजूमदार ने 2012 में यह संपत्ति किराए पर ली थी, लेकिन किराए का समझौता 2015 में समाप्त हो गया था। फ्लैट मालिक का आरोप है कि न तो कोई नया समझौता किया गया और न ही मूल पट्टा नवीनीकृत किया गया, फिर भी फ्लैट पर कब्जा जारी रहा।
इस घटना के संबंध में बिधाननगर उत्तर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस पर टीएमसी नेता ने जमानत के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार को पुलिस ने बुधवार को साल्ट लेक स्थित एक किराए के मकान पर कथित अवैध कब्जे के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

मजूमदार अपनी पत्नी के साथ कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके साल्ट लेक स्थित एक मकान में रह रहे थे। मकान मालकिन ने हाल ही में बिधाननगर (नॉर्थ) थाने में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मजूमदार न केवल लंबे समय से किराया नहीं दे रहे थे, बल्कि किराया मांगने पर राजनीतिक प्रभाव का हवाला देकर उन्हें धमकाते और दुर्व्यवहार भी करते थे।

शिकायत के अनुसार, मजूमदार वर्ष 2014 में अपनी पत्नी के साथ मामूली किराए पर उस मकान में रहने आए थे। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने किराया देना भी बंद कर दिया। मकान मालकिन का आरोप है कि जब भी उनसे किराया देने या मकान खाली करने को कहा जाता था, तो वह गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देते थे।

बताया गया है कि यह मकान पहले मकान मालकिन के पति के नाम पर था। उनके निधन के बाद इसकी मालिकाना हक उनकी पत्नी को मिल गया।

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