कार्यक्रम के बाद लेखिका लक्ष्मी मुर्देश्वर पुरी, राज्यसभा के पूर्व सांसद राकेश सिन्हा और संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने महिलाओं की स्थिति और देश की संस्कृति को लेकर अपने विचार आईएएनएस के साथ साझा किए।
कार्यक्रम में पहुंचीं लेखिका लक्ष्मी मुर्देश्वर पुरी ने भी महिलाओं का हौसला बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा, “यहां आकर और इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर मैं खुद को बहुत सम्मानित महसूस कर रही हूं। यह पहला ऐसा कार्यक्रम है, जहां हर राज्य की महिला, हर पीढ़ी की बच्चियों और हर वर्ग की महिलाओं को साथ लाया गया है।
महिला दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम पर राज्यसभा के पूर्व सांसद राकेश सिन्हा ने कहा, “वामपंथी महिला संगठनों के द्वारा इन मुद्दों की उपेक्षा की गई है, जबकि राष्ट्रवादी महिला संगठन ने उन्हीं मुद्दों पर चर्चा की है। सब सबसे अच्छी उपलब्धि यह है कि महिला आंदोलन अब सर्व समावेशी हो गया है और देश के हर कोने में भारत के दृष्टिकोण से महिलाओं के लिए काम कर रहा है।”
समाजसेविका शशि बुवना भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर दिल्ली में हुए कार्यक्रम का हिस्सा रही। उन्होंने कहा कि महिलाओं के विकास के लिए सालों से काम कर रही हूं और मेरे मन में यही विचार रहता है कि महिलाएं सिर्फ परिवार तक सीमित न रहें, बल्कि एक अच्छे समाज का भी निर्माण करें।
संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “इस मंच के जरिए प्राचीन ज्ञान और आधुनिकता की बातें एक साथ हुई हैं, और हमें खुशी है कि आज के दिन हमने और बाकी सभी दिग्गजों ने महिलाओं से जुड़े जटिल विषयों पर बात की।
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