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अमरनाथ यात्रा असमय स्थगित : खराब मौसम और ट्रैक की खतरनाक स्थिति बनी कारण

बालटाल और पहलगाम दोनों पारंपरिक मार्गों से यात्रा को फिर से शुरू करना संभव नहीं

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अमरनाथ यात्रा-2025 को निर्धारित समापन तिथि से लगभग एक सप्ताह पहले ही रविवार (3 अगस्त)को स्थगित कर दिया गया है। यह निर्णय खराब मौसम और यात्रा मार्गों की जर्जर हालत के कारण लिया गया। यात्रा का समापन 9 अगस्त को रक्षाबंधन के पर्व के साथ होना था, लेकिन अब यह तय तिथि से पहले ही समाप्त कर दी गई है।

तीन दिन पूर्व भारी वर्षा के चलते यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था, लेकिन अब अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बालटाल और पहलगाम दोनों पारंपरिक मार्गों से यात्रा को फिर से शुरू करना संभव नहीं है। कश्मीर के संभागीय आयुक्त विजय कुमार बिधूड़ी ने बताया कि हाल की मूसलधार बारिश ने ट्रैक को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है और मार्ग अत्यंत असुरक्षित हो गया है। दोनों रास्तों की तत्काल मरम्मत और रखरखाव आवश्यक है, और मरम्मत कार्य के दौरान यात्रा को जारी रखना व्यावहारिक नहीं होगा।

हालांकि यात्रा असमय स्थगित हो गई, फिर भी इस वर्ष करीब चार लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा के दर्शन किए। श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह मौसम बिगड़ने के बाद यात्रियों की संख्या में तेज गिरावट देखी गई थी।

इस वर्ष यात्रा के लिए सुरक्षा प्रबंध भी अभूतपूर्व स्तर पर किए गए थे। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सरकार ने 600 से अधिक अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती की थी, जिससे यह देश की सबसे अधिक सुरक्षा-पहरे वाली तीर्थ यात्राओं में से एक बन गई। जम्मू से दोनों आधार शिविरों तक तीर्थयात्रियों को सख्त सुरक्षा घेरे में काफिलों के रूप में लाया गया और काफिले की आवाजाही के दौरान श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर आम नागरिकों का आवागमन रोक दिया गया।

अमरनाथ यात्रा का इतिहास 1850 के दशक में एक मुस्लिम चरवाहे बोटा मलिक द्वारा गुफा की खोज से जुड़ा है और यह यात्रा लंबे समय तक कश्मीर की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक रही है। 2005 तक बोटा मलिक का परिवार ही यात्रा आयोजन में अग्रणी भूमिका निभाता था, जिसके बाद यह जिम्मेदारी श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड को सौंप दी गई।

हालांकि बीते कुछ वर्षों में स्थानीय निवासियों और यात्रियों के बीच की पारंपरिक आत्मीयता कम होती दिखी है। अब ज़्यादातर श्रद्धालु सुरक्षा घेरे में रहते हैं, और केवल घोड़े वाले, पालकी चालक जैसे सेवा प्रदाता ही प्रत्यक्ष संपर्क में आते हैं।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यात्रा की बहाली तभी संभव होगी जब मार्ग पूरी तरह सुरक्षित और मौसम अनुकूल हो जाए। फिलहाल श्रद्धालुओं को संयम बरतने और आगे की जानकारी के लिए आधिकारिक चैनलों पर निगरानी बनाए रखने की सलाह दी गई है।

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