मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से धर्म परिवर्तन से जुड़ी एक चर्चित घटना सामने आई है। जिले के खिरकिया क्षेत्र के रहने वाले एक मुस्लिम युवक ने बकरीद के दौरान पशुओं की कुर्बानी से आहत होकर स्वेच्छा से सनातन धर्म स्वीकार करने का दावा किया है। युवक, जिसकी पहचान पहले बिलाल के रूप में थी, अब ‘विशाल’ नाम से अपनी नई धार्मिक और सामाजिक पहचान के साथ जीवन की शुरुआत कर रहा है।
शनिवार (30 मई)को खंडवा के प्रसिद्ध महादेवगढ़ मंदिर में आयोजित एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान के दौरान युवक ने वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार सनातन धर्म को अपनाया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और मंदिर से जुड़े लोग मौजूद रहे।
युवक ने मंदिर प्रबंधन और उपस्थित लोगों के समक्ष बताया कि वह लंबे समय से बकरीद के दौरान होने वाली पशु कुर्बानी को लेकर मानसिक रूप से व्यथित था। उसके अनुसार, त्योहार के अवसर पर बड़ी संख्या में मूक पशुओं की हत्या का दृश्य उसे बचपन से ही विचलित करता रहा।
युवक ने कहा कि समय के साथ यह पीड़ा और गहरी होती गई और उसने वैकल्पिक आध्यात्मिक मार्ग की तलाश शुरू कर दी। हाल ही में बकरीद के अवसर पर फिर से पशु कुर्बानी के दृश्य देखने के बाद उसने सनातन धर्म अपनाने का अंतिम निर्णय लिया।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, युवक की इच्छा के अनुरूप महादेवगढ़ मंदिर परिसर में वैदिक परंपराओं के तहत विशेष अनुष्ठान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान पहले उसका मुंडन संस्कार कराया गया और फिर शुद्धिकरण प्रक्रिया संपन्न हुई।
अनुष्ठान में ‘दशविधि स्नान’ की परंपरा का पालन किया गया, जिसमें गंगाजल, गो-दुग्ध, पंचामृत, गोमूत्र, गौ-गोबर, तुलसी रज, फल, धातु, पंचगव्य और अन्य वैदिक तत्वों का उपयोग किया गया। मंत्रोच्चार और धार्मिक विधानों के बीच उपनयन संस्कार भी सम्पन्न कराया गया।
मंदिर प्रबंधन का कहना है कि यह प्रक्रिया युवक की स्वेच्छा और सहमति से पूरी की गई। धार्मिक अनुष्ठान के बाद मंदिर में भगवान शिव की विशेष महाआरती आयोजित की गई। इस दौरान मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री राम’ के जयघोषों से गूंज उठा।
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने युवक के नए जीवन की शुरुआत पर शुभकामनाएं दीं। मंदिर प्रशासन की ओर से उसे सनातन धर्म की परंपराओं और धार्मिक मूल्यों को समझने के लिए पवित्र ग्रंथ ‘रामायण’ भी भेंट की गई।
मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, युवक ने स्वयं आगे आकर धर्म परिवर्तन की इच्छा व्यक्त की थी। उसने बताया कि वह लंबे समय से सनातन धर्म के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं से प्रभावित था और अब उसी मार्ग पर चलने का संकल्प लिया है।
इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा का माहौल है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। फिलहाल यह घटना धार्मिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत आस्था और सामाजिक विमर्श के संदर्भ में क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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