सबरीमाला में भीड़ को नियंत्रित नहीं किया गया तो आपदा अपरिहार्य: केरल उच्च न्यायालय

अदालत ने TDB के उस स्वीकारोक्ति पर भी आपत्ति जताई कि स्पॉट बुकिंग के बाद भी 10,000 से अधिक लोग पहाड़ी पर चढ़ गए, जिससे गर्भगृह और मंदिर परिसर के आसपास अभूतपूर्व भीड़ बढ़ गई। पीठ ने तीखी टिप्पणी कर कहा, “मंदिर जितना सुरक्षित रूप से संभाल सकता है, उससे ज्यादा भक्तों को क्यों अंदर जाने दिया जा रहा है? क्या उद्देश्य है हर मिनट 80 लोगों को धक्का देकर अंदर भेजने का?”

सबरीमाला में भीड़ को नियंत्रित नहीं किया गया तो आपदा अपरिहार्य: केरल उच्च न्यायालय

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केरल हाई कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में भारी भीड़ और अव्यवस्थित प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार और त्रावणकोर देवस्वं बोर्ड (TDB) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि भीड़ नियंत्रण तत्काल प्रभाव से प्रभावी नहीं किया गया, तो आपदा अपरिहार्य है। मंदिर खुलने के मात्र 48 घंटों के भीतर करीब दो लाख श्रद्धालुओं के पहुंच जाने से स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होती दिखी, जिससे पुलिस और देवस्वं बोर्ड की तैयारियां नाकाफी साबित हुईं।

मामला तब गंभीर हो गया जब मंगलवार को भारी भीड़ के बीच कई बच्चों सहित हजारों श्रद्धालु चढ़ाई करते दिखे, और व्यवस्थाएं चरमरा गईं। अदालत की पीठ ने कहा कि सबरीमाला की तीर्थयात्रा सीज़न की तैयारी छह महीने पहले ही शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन स्थिति दर्शाती है कि ऐसा नहीं हुआ। Bench ने यह भी सवाल उठाया कि जब भीड़ बढ़ती दिख रही थी, तो वर्चुअल क्यू स्लॉट्स की संख्या कम क्यों नहीं की गई और किस आधार पर इतने लोगों को प्रवेश दिया गया।

अदालत ने TDB के उस स्वीकारोक्ति पर भी आपत्ति जताई कि स्पॉट बुकिंग के बाद भी 10,000 से अधिक लोग पहाड़ी पर चढ़ गए, जिससे गर्भगृह और मंदिर परिसर के आसपास अभूतपूर्व भीड़ बढ़ गई। पीठ ने तीखी टिप्पणी कर कहा, “मंदिर जितना सुरक्षित रूप से संभाल सकता है, उससे ज्यादा भक्तों को क्यों अंदर जाने दिया जा रहा है? क्या उद्देश्य है हर मिनट 80 लोगों को धक्का देकर अंदर भेजने का?” अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्थिति में अव्यवस्था के कारण कोई दुर्घटना नहीं होनी चाहिए।

कोर्ट ने राज्य सरकार और TDB दोनों से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है और निर्देश दिया है कि वे शुक्रवार तक अपने जवाब दाखिल करें।

इस बीच, विपक्ष ने भी राज्य सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार बुनियादी सुविधाएं, जैसे पर्याप्त पानी, भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त पुलिस बल और आवश्यक आधारभूत व्यवस्था उपलब्ध कराने में विफल रही। विपक्षी नेता वी.डी. सतीशन ने कहा कि तैयारियां बहुत पहले शुरू हो जानी चाहिए थीं और अब अदालत की त्वरित हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

संपूर्ण विवाद के बीच, हाई कोर्ट की यह चेतावनी स्पष्ट करती है कि सबरीमाला में भीड़ प्रबंधन का पुनर्मूल्यांकन और सुधार अब तत्काल और अनिवार्य है, अन्यथा किसी बड़ी त्रासदी को टालना असंभव होगा।

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