यूपी सरकार का बड़ा फैसला: बांग्लादेश से विस्थापित हिंदू परिवारों का होगा पुनर्वसन

कानपुर देहात में 99 परिवारों को ज़मीन आवंटित

यूपी सरकार का बड़ा फैसला: बांग्लादेश से विस्थापित हिंदू परिवारों का होगा पुनर्वसन

UP government takes major decision: Hindu families displaced from Bangladesh will be resettled.

उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर दशकों से राज्य में रह रहे हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वास को लेकर एक अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 29 जनवरी को हुई कैबिनेट बैठक में मेरठ जिले में रह रहे ऐसे 99 परिवारों के पुनर्वास प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

यह मामला मेरठ जिले के मवाना तहसील स्थित नगला गुसाईं गांव से जुड़ा है। यह 99 हिंदू बंगाली परिवार लंबे समय से झील के किनारे स्थित सरकारी भूमि पर रह रहे थे। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, यह परिवार पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापन के बाद यहां आकर बसे थे, लेकिन उनका निवास कानूनी रूप से अधिकृत नहीं था। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने इनके स्थायी और सम्मानजनक पुनर्वास की योजना को आगे बढ़ाया।

कैबिनेट के फैसले के तहत सभी 99 परिवारों को कानपुर देहात जिले की रसूलाबाद तहसील में बसाया जाएगा। इनमें से 50 परिवारों को भैंसा गांव में पुनर्वास विभाग के नाम दर्ज 11.1375 हेक्टेयर (27.5097 एकड़) भूमि पर बसाया जाएगा, जबकि शेष 49 परिवारों को ताजपुर तरसौली गांव में पुनर्वास विभाग के नाम दर्ज 10.530 हेक्टेयर (26.009 एकड़) भूमि आवंटित की जाएगी।

सरकार के निर्णय के अनुसार, प्रत्येक परिवार को 0.50 एकड़ भूमि दी जाएगी। यह भूमि 30 वर्षों की लीज़ पर दी जाएगी, जिसे आगे 30-30 वर्षों के लिए नवीनीकृत किया जा सकेगा। इस प्रकार अधिकतम लीज़ अवधि 90 वर्ष तक हो सकती है। लीज़ प्रीमियम या निर्धारित किराये के आधार पर दी जाएगी, जिससे भूमि पर परिवारों को दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

राज्य सरकार का कहना है कि इस फैसले से एक ओर जहां झील क्षेत्र की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर विस्थापित परिवारों को सम्मानजनक, सुरक्षित और स्थायी जीवन का अवसर मिलेगा। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, पुनर्वास स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं के विकास की प्रक्रिया भी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी।

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार विस्थापित और कमजोर वर्गों के लिए पुनर्वास एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी नीतियों पर जोर दे रही है। सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे लंबे समय से चले आ रहे कानूनी और पर्यावरणीय विवादों का भी समाधान होगा।

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