IIFT ने दुबई में पहला विदेशी कैंपस खोलकर अपने ग्लोबल फुटप्रिंट्स का किया विस्तार

मंत्रालय ने इस कदम को भारतीय उच्च शिक्षा के वैश्वीकरण में एक गौरवपूर्ण क्षण करार दिया, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्य और भारतीय संस्थानों के अंतरराष्ट्रीयकरण को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

IIFT ने दुबई में पहला विदेशी कैंपस खोलकर अपने ग्लोबल फुटप्रिंट्स का किया विस्तार

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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत स्वायत्त निकाय भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) ने शुक्रवार को दुबई में अपना पहला विदेशी कैंपस खोलने की घोषणा की है। यह कदम आईआईएफटी की वैश्विक उपस्थिति को बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार शिक्षा में भारत की भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस ऐतिहासिक विकास को शिक्षा मंत्रालय की मंजूरी के साथ-साथ विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) से प्राप्त ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ के बाद संभव बनाया गया है। मंत्रालय ने इस कदम को भारतीय उच्च शिक्षा के वैश्वीकरण में एक गौरवपूर्ण क्षण करार दिया, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्य और भारतीय संस्थानों के अंतरराष्ट्रीयकरण को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस अवसर पर कहा कि यह नई पहल नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 की भावना को दर्शाती है, जो भारत की शिक्षा के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार और वैश्विक नेतृत्व में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “यह भारत-यूएई साझेदारी को भी मजबूत करेगा और इस कैंपस से भविष्य के व्यापार नेताओं को आकार देने में मदद मिलेगी।”

वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने आईआईएफटी को इसके 62 वर्षों के इतिहास में इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि दुबई में यह पूर्ण विकसित कैंपस भारत के लिए एक वैश्विक व्यापार शिक्षा केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में उत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करेगा।

आईआईएफटी के कुलपति प्रोफेसर राकेश मोहन जोशी ने अपने बयान में कहा कि वे संस्थान को विश्वस्तरीय बनाने और रिसर्च, प्रशिक्षण तथा शिक्षा के माध्यम से दुबई कैंपस में आईआईएफटी की छाप छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने भारत की शैक्षणिक और आर्थिक कूटनीति को सुदृढ़ करने के लिए शिक्षा और अनुसंधान में निरंतर उत्कृष्टता की आवश्यकता पर जोर दिया।

यह कदम न केवल आईआईएफटी के लिए बल्कि भारत के वैश्विक शिक्षा और व्यापार क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, जो भारतीय शिक्षा प्रणाली के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव को बढ़ावा देगा।

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