भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार (29 मई) को 2024–25 की वार्षिक रिपोर्ट जारी की, जिसमें कहा गया है कि हेडलाइन उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति (महंगाई दर) के हालिया आंकड़े नरम बने हुए हैं और इसके चलते अगले 12 महीनों में महंगाई 4 प्रतिशत के लक्ष्य पर स्थिर हो सकती है, इस पर अधिक विश्वास जताया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि FY26 (2025–26) के लिए महंगाई का अनुमान 4% और जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.5% लगाया गया है। आरबीआई का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था का भविष्य उज्ज्वल बना हुआ है।
रिजर्व बैंक ने कहा, “नरम महंगाई और मध्यम गति की आर्थिक वृद्धि को देखते हुए मौद्रिक नीति को विकास समर्थक बनाए रखने की जरूरत है, लेकिन वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर सतर्क निगरानी जरूरी है।” आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने फरवरी से अब तक कुल 50 बेसिस पॉइंट की कटौती करते हुए रेपो रेट को घटाया है और अप्रैल 2025 की मौद्रिक नीति समीक्षा में ‘समायोजनात्मक’ (accommodative) रुख अपनाया है। इससे संकेत मिलता है कि आरबीआई की वर्तमान प्राथमिकता आर्थिक वृद्धि को समर्थन देना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025–26 में उपभोग मांग में पुनरुद्धार, सरकारी पूंजी व्यय पर बल, राजकोषीय अनुशासन, बैंकों और कंपनियों की मजबूत बैलेंस शीट, नरम वित्तीय स्थितियां, और सेवा क्षेत्र की मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगे।
आरबीआई ने कहा कि भविष्य में आपूर्ति श्रृंखला का स्थिरीकरण, वैश्विक जिंस कीमतों में नरमी, सामान्य से बेहतर मानसून और जलाशयों के ऊंचे स्तर के चलते FY26 में महंगाई की स्थिति अनुकूल रहने की संभावना है।
हालांकि, रिपोर्ट ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, संरक्षणवाद (protectionism) की नीतियां, लंबे समय तक जारी भू-राजनीतिक तनाव, और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता को प्रमुख नीचे की ओर झुकाव वाले जोखिम (downside risks) के रूप में चिन्हित किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये कारक विकास की संभावनाओं को बाधित कर सकते हैं और महंगाई में ऊपर की ओर दबाव डाल सकते हैं।
भारतीय बैंकिंग क्षेत्र को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि यह क्षेत्र लचीला और स्थिर बना हुआ है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच जोखिम प्रबंधन को और सुदृढ़ बनाए रखने की आवश्यकता है।
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