नगरोटा में सीट को लेकर तकरार, कांग्रेस हटने को नहीं तैयार: नगरोटा उपचुनाव को लेकर कांग्रेस और नेकां के बीच सीधी टक्कर बन चुकी है। दोनों दल इस सीट से अपना-अपना उम्मीदवार उतारना चाहते हैं। कांग्रेस इसे किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं है, जबकि नेकां भी पीछे हटने के मूड में नहीं।
आम आदमी पार्टी के एकमात्र विधायक द्वारा समर्थन वापसी के बाद से सरकार पहले ही दबाव में है। अब अगर कांग्रेस भी समर्थन वापस लेती है तो उमर अब्दुल्ला सरकार अल्पमत में आ सकती है।
भाजपा ने खोले पत्ते, नगरोटा और बडगाम दोनों सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने स्पष्ट किया कि भाजपा दोनों सीटों से उपचुनाव लड़ेगी। नगरोटा को पार्टी ने परंपरागत सीट बताया है और दावा किया है कि वे वहां फिर से जीत दर्ज करेंगे। बडगाम में भी भाजपा जमीनी स्तर पर तैयारी कर रही है।
उपचुनाव अमरनाथ यात्रा के बाद संभव, आयोग की घोषणा बाकी: नगरोटा और बडगाम सीटें छह माह से रिक्त हैं। जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में छह माह से अधिक सीट खाली नहीं रखी जा सकती। हालांकि, जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में यह नियम लचीला हो सकता है। चुनाव आयोग अमरनाथ यात्रा के बाद तारीखों की घोषणा कर सकता है।
राजनीतिक दलों के बयानों से गर्माया माहौल: कांग्रेस प्रवक्ता रविंद्र शर्मा ने कहा कि पार्टी नगरोटा सीट से चुनाव लड़ेगी और तैयारी तेज है। नेकां नेता रतन लाल गुप्ता ने भी कहा कि पार्टी दोनों सीटों से चुनाव लड़ेगी और जीत का विश्वास जताया। कांग्रेस नेता रमन भल्ला ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया गया, इस पर पार्टी अब चुप नहीं बैठेगी।
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