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बांग्लादेश: बीएनपी ने सुधार की दलील खारिज की, जल्द चुनाव की मांग दोहराई!

डॉ. खान ने कहा, "बीएनपी अब 'पहले सुधार, फिर चुनाव' जैसी दलील नहीं मानेगी। सुधार और न्याय एक सतत प्रक्रिया है।

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बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तर्क “पहले न्याय और सुधार, फिर चुनाव” को सख्ती से खारिज कर दिया है। पार्टी ने स्पष्ट कहा है कि अब किसी भी सूरत में चुनाव में देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार को पार्टी के सदस्यता अभियान के दौरान बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य डॉ. अब्दुल मोईन खान ने कहा कि अब सबसे अहम मुद्दा जनता को मताधिकार का अधिकार देना है और इसके लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव जल्द से जल्द कराए जाने चाहिए।

डॉ. खान ने कहा, “बीएनपी अब ‘पहले सुधार, फिर चुनाव’ जैसी दलील नहीं मानेगी। सुधार और न्याय एक सतत प्रक्रिया है। अंतरिम सरकार का मुख्य कर्तव्य लोकतंत्र की पुनर्स्थापना है, और इसके लिए सत्ता को जल्द से जल्द जनता को लौटाया जाना चाहिए।”

उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संयम बरतने की सलाह देते हुए कहा कि उनका आचरण लोकतांत्रिक होना चाहिए, न कि सत्तारूढ़ अवामी लीग की तरह।

इससे एक दिन पहले, बीएनपी के वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रुहुल कबीर रिजवी ने भी यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि सुधार कोई स्थिर प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक गतिशील प्रक्रिया है।

उन्होंने कहा, “सुधार कोई थाईलैंड की पहाड़ी श्रृंखला की तरह स्थिर नहीं है।”

रिजवी ने यह भी कहा कि सुधार जरूरी हैं, लेकिन उन्हें चुनाव टालने के बहाने के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। जनता को गुमराह करने की कोशिश क्यों की जा रही है? चुनाव टालने की जो कोशिश की जा रही है, वह लोकतंत्र के खिलाफ है। सबसे जरूरी काम सत्ता को जनता के हाथों में लौटाना है।

बीएनपी की यह कड़ी प्रतिक्रिया उस वक्त आई है, जब नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के संयोजक नाहिद इस्लाम ने शुक्रवार को रैली में कहा था कि देश की जनता न्यायिक और राजनीतिक सुधारों के बिना आम चुनाव नहीं होने देगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगस्त 2024 में निर्वाचित अवामी लीग सरकार को सत्ता से हटाने के बाद बनी यूनुस-नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पारदर्शिता और लोकतांत्रिक बहाली के स्पष्ट रोडमैप से अभी भी दूर है।

गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ एकजुट होकर जिस विपक्षी गठबंधन ने जुलाई आंदोलन के जरिए मुहम्मद यूनुस को अंतरिम प्रमुख बनाया था, उसमें अब मतभेद उभरने लगे हैं।

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