बांग्लादेश में डेंगू का प्रकोप गंभीर रूप से बढ़ता जा रहा है और अब यह देशव्यापी संकट का रूप लेता दिख रहा है। देश के कीट वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो डेंगू वायरस बांग्लादेश के सभी 64 जिलों को अपनी चपेट में ले सकता है। मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के प्रयासों को विशेषज्ञों ने अपर्याप्त करार दिया है। वे मानते हैं कि मच्छरों की रोकथाम के लिए सरकार केवल फॉगिंग जैसी सतही कोशिशों पर निर्भर है, जबकि मच्छरों के प्रजनन स्रोतों को जड़ से खत्म करने की दिशा में गंभीर काम नहीं हो रहा।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार (13 जुलाई)सुबह तक पिछले 24 घंटों में डेंगू से एक और व्यक्ति की मौत हुई है। इसके साथ ही 2025 में अब तक डेंगू से 56 मौतें हो चुकी हैं। वहीं, 420 नए मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए हैं जिससे कुल संक्रमितों की संख्या 14,880 तक पहुंच गई है।
डेंगू के नए मामलों की बात करें तो सबसे ज्यादा मरीज बरिशाल डिविजन से सामने आए हैं, जहां कुल 116 मरीज दर्ज किए गए हैं। इसके बाद चटगांव डिविजन (शहरी क्षेत्र से बाहर) में 79 नए मरीज पाए गए। ढाका डिविजन (नगर निगमों के बाहर) में 60 मरीज, जबकि ढाका साउथ सिटी कॉरपोरेशन क्षेत्र में 57 मरीज और ढाका नॉर्थ सिटी कॉरपोरेशन में 25 नए डेंगू संक्रमितों की पुष्टि हुई है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि डेंगू संक्रमण अब राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों के अलावा अन्य डिविजनों में भी तेजी से फैल रहा है।
प्रख्यात कीट वैज्ञानिक कबीरुल बशार ने कहा कि सरकार सिर्फ फॉगिंग पर निर्भर न रहे। उन्होंने चेताया, “फॉगिंग सिर्फ उन क्षेत्रों में होनी चाहिए जहां डेंगू के पुष्ट मामले हैं। हर गली-मोहल्ले में फॉगिंग करने का कोई बड़ा लाभ नहीं, फिर भी सरकार इसे ही मुख्य रणनीति बना रही है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि लोग अपने घरों और आस-पास की जगहों को साफ नहीं करेंगे और मच्छरों के अंडे देने की जगहों को खत्म नहीं करेंगे, तो डेंगू को रोकना नामुमकिन हो जाएगा।
जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों, डॉक्टरों और कीट वैज्ञानिकों ने सामूहिक रूप से कहा है कि न तो स्वास्थ्य प्रणाली में कोई बुनियादी सुधार हुआ है, और न ही डेंगू के लिए ठोस रोकथाम योजना बनाई गई है। यही कारण है कि शहरों और गांवों दोनों में लोग डेंगू की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। विशेषज्ञों ने ज़ोर दिया कि अब समय आ गया है कि सरकार के साथ-साथ सामान्य नागरिकों को भी जिम्मेदारी लेनी होगी। समाज की भागीदारी और व्यापक जनजागरूकता के बिना डेंगू की इस महामारी को थामा नहीं जा सकता।
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