भारत का पहला डिजिटल नोमैड विलेज अब सिक्किम के पाक्योंग जिले के याकतेन गांव में शुरू हो गया है। इस अनोखे प्रोजेक्ट का उद्देश्य दूर से काम करने वाले पेशेवरों को एक शांत और आधुनिक कार्य-पर्यावरण देना है, साथ ही स्थानीय ग्रामीण परिवारों को नियमित आमदनी देने का रास्ता भी खोलना है।
‘Nomad Sikkim’:
‘Nomad Sikkim’ नामक इस परियोजना को पाक्योंग जिला प्रशासन और सामाजिक संस्था ‘सर्वहिताय’ के संयुक्त प्रयास से शुरू किया गया है। यह पहल खास तौर पर उन महीनों (अप्रैल से अक्टूबर) के लिए बनाई गई है, जब सिक्किम में पर्यटन धीमा हो जाता है और होमस्टे संचालकों की आय घट जाती है। अब याकतेन गांव में ऐसे ब्रॉडबैंड-सुसज्जित होमस्टे बनाए गए हैं जहां डिजिटल प्रोफेशनल्स बिना किसी रुकावट के रहकर काम कर सकते हैं।
याकतेन गांव को पूरी तरह से अपग्रेड किया गया है:
- डुअल इंटरनेट लाइन
- गांव भर में Wi-Fi कवरेज
- बिजली बैकअप सिस्टम, जिससे पावर कट से काम प्रभावित न हो। साथ ही, जल जीवन मिशन के तहत पानी आपूर्ति व्यवस्था को भी बेहतर किया जा रहा है। याकतेन तक पहुंच भी आसान है, क्योंकि यह पाक्योंग एयरपोर्ट के पास स्थित है और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
यहां के होमस्टे सिर्फ कमरे नहीं हैं, बल्कि वे आगंतुकों को स्थानीय परिवारों के साथ रहने, घर का बना हुआ पारंपरिक भोजन खाने और सिक्किमी संस्कृति का अनुभव लेने का मौका देते हैं। पर्यटक लोक संगीत, नृत्य, मठों की यात्रा और प्राकृतिक ट्रेल्स जैसे अनुभवों का आनंद ले सकते हैं। यह स्थान आधुनिक कार्य और पारंपरिक जीवन का संतुलन प्रस्तुत करता है।
इस मॉडल से स्थानीय लोगों की मौसमी पर्यटन पर निर्भरता कम होगी और उन्हें सालभर आय का स्रोत मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भारत के अन्य गांवों में भी दोहराया जा सकता है, जिससे संतुलित और टिकाऊ ग्रामीण विकास संभव हो सके।
यह गांव न केवल काम करने की सुविधा देता है, बल्कि मानसिक और शारीरिक विश्राम भी। यहां से 7 किलोमीटर की ट्रेकिंग करके झंडी दारा व्यू पॉइंट पहुंचा जा सकता है, जहां से माउंट कंचनजंघा का भव्य दृश्य दिखाई देता है। याकतेन अब एक ऐसा अनोखा स्थल बन चुका है, जहां डिजिटल कार्यक्षमता, प्राकृतिक सुंदरता और स्थानीय जीवनशैली का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
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