आज की तेज़ रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली ने मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे समय में एक पारंपरिक औषधीय पौधा, जिसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों से लेकर आधुनिक विज्ञान तक में मिलता है — ‘कृष्ण कमल’ (Passion Flower) — राहत की एक प्राकृतिक चाबी बनकर सामने आया है।
बैंगनी रंग का चमकदार और सुगंधित यह फूल न केवल देखने में सुंदर होता है, बल्कि अनिद्रा, मानसिक चिंता, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और मूत्र विकारों जैसी कई समस्याओं से राहत देने में भी मदद करता है। इसके शांतिदायक गुणों के कारण इसे आयुर्वेद में विशेष स्थान प्राप्त है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने चर्चित रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कृष्ण कमल के लाभों का उल्लेख किया है, जिससे इसके औषधीय महत्व को और बल मिला है।
कृष्ण कमल को भगवान श्रीकृष्ण, ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रिय पुष्प माना गया है। महाभारत जैसे ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह फूल सकारात्मक ऊर्जा का वाहक है और वातावरण को शांत एवं पवित्र बनाता है।
आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि कृष्ण कमल का उपयोग मानसिक शांति देने वाले औषधीय पौधे के रूप में लंबे समय से होता रहा है। इसकी चाय या अर्क के सेवन से नींद न आने की समस्या, मानसिक अशांति, दिल की धड़कनों में तेजी, उच्च रक्तचाप, और तनाव में काफी राहत मिलती है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, कृष्ण कमल की चाय विशेष रूप से लाभकारी है। एक चम्मच सूखे कृष्ण कमल फूल का पाउडर एक कप पानी में उबालें, 5-10 मिनट तक छोड़ने के बाद छानकर गुनगुना पी लें। इस चाय का दिन में दो से तीन बार सेवन किया जा सकता है। नींद न आने की स्थिति में रात को सोने से पहले इसका सेवन विशेष रूप से उपयोगी है।
कृष्ण कमल न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह घर की शोभा भी बढ़ाता है। इसका पौधा बगीचों और छतों पर आसानी से लगाया जा सकता है, और यह स्वच्छ हवा के साथ-साथ मानसिक शांति का माहौल भी प्रदान करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव और अनिद्रा जैसी आधुनिक जीवनशैली की समस्याओं का समाधान कृत्रिम दवाओं के बजाय प्राकृतिक उपायों से किया जाए, तो दीर्घकालिक और बिना साइड इफेक्ट राहत संभव है। और इस दिशा में ‘कृष्ण कमल’ एक प्रभावशाली विकल्प बनकर उभरा है।
स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ने के इच्छुक लोगों के लिए कृष्ण कमल न केवल एक फूल, बल्कि प्रकृति का अनुपम उपहार है।
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