देश में कोयले पर आधारित ताप विद्युत संयंत्रों (थर्मल पावर प्लांट) के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार द्वारा फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (FGD) सिस्टम की अनिवार्य स्थापना में दी गई ढील से इन संयंत्रों को सालाना टैरिफ खर्च में ₹19,000 करोड़ से लेकर ₹24,000 करोड़ तक की बचत हो सकती है। शुक्रवार को जारी केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट में यह अहम जानकारी दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, यह बचत 0.17 से 0.22 रुपए प्रति यूनिट के बीच होगी। सरकार के इस निर्णय से 145 गीगावाट क्षमता वाले कैटेगरी-सी प्लांट, जो कि थर्मल इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर (IPP) के अंतर्गत आते हैं, उन्हें प्रत्यक्ष लाभ होगा। इन संयंत्रों के लिए एफजीडी लगाना अब जरूरी नहीं रह गया है, जिससे इन पर प्रति मेगावाट ₹0.6-0.8 करोड़ का पूंजीगत व्यय बच सकेगा। अनुमान है कि इससे कुल पूंजीगत खर्च में ₹87,000 करोड़ से ₹1.16 लाख करोड़ की कटौती हो सकती है।
केयरएज रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक सब्यसाची मजूमदार ने बताया, “कैटेगरी सी परियोजनाओं को एफजीडी की अनिवार्यता से छूट देना थर्मल पावर उत्पादकों के लिए सकारात्मक कदम है, क्योंकि इन परियोजनाओं में से 80% में एफजीडी अब तक लागू नहीं किया गया था। इससे भविष्य में टैरिफ वृद्धि का जो बोझ उपभोक्ताओं पर आता, वह भी टल गया है।”
पिछले सप्ताह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर एफजीडी अनिवार्यता को सीमित कर दिया। अब यह केवल उन्हीं कोल-बेस्ड पावर प्लांट पर लागू होगी, जो दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं।
कोयले पर आधारित पावर प्लांट भारत की ऊर्जा जरूरतों की रीढ़ माने जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में देश की कुल बिजली का 75% उत्पादन कोयला आधारित संयंत्रों से हुआ, जबकि इनकी संयुक्त स्थापित क्षमता मात्र 47% है। इसका मुख्य कारण इन संयंत्रों का उच्च प्लांट लोड फैक्टर (PLF) है, जो उन्हें सौर या पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों की तुलना में अधिक प्रभावशाली बनाता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2030 तक, नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के बावजूद, कोयला आधारित पावर प्लांट लगभग 60% उत्पादन हिस्सेदारी बनाए रखेंगे। ऊर्जा खपत बढ़ने के मद्देनज़र, थर्मल पावर का कुल ऑफटेक 1,233 बिलियन यूनिट तक पहुंचने का अनुमान है।
केयरएज रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर शैलेंद्र सिंह बघेल ने कहा, “कैटेगरी-सी संयंत्रों को छूट देने से जहां थर्मल पावर उत्पादकों पर पूंजीगत बोझ कम होगा, वहीं कैटेगरी ए और बी परियोजनाओं पर एफजीडी की आवश्यकता बरकरार रखते हुए सरकार ने पर्यावरणीय संतुलन को भी बनाए रखा है।” इस संशोधन से जहां ऊर्जा उत्पादकों को आर्थिक राहत मिलेगी, वहीं लंबे समय तक पर्यावरणीय प्रभावों पर संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखने की चुनौती भी सरकार के सामने बनी रहेगी।
यह भी पढ़ें:
जमीन के बदले नौकरी घोटाला: लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका, निचली अदालत की सुनवाई जारी रहेगी
परमाणु-सक्षम पृथ्वी-2 और अग्नि-1 मिसाइलों का सफल परीक्षण, लद्दाख में भी दागा ‘आकाश प्राइम’!
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को ईडी ने जन्मदिन के दिन किया गिरफ्तार!



