उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (19 जुलाई)को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। हालांकि इसे आधिकारिक रूप से एक ‘शिष्टाचार भेंट’ बताया गया है, लेकिन इस अचानक से की गई मुलाकात ने पार्टी के भीतर चल रही सियासी उठापटक को लेकर चर्चाओं को हवा दे दी है।
इन बैठकों में उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष की नियुक्ति और 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर गहन चर्चा हुई। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी की अगस्त में वाराणसी यात्रा भी बातचीत का हिस्सा रही। योगी आदित्यनाथ रविवार को मेरठ में कांवड़ यात्रा से जुड़ी धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे और कांवड़ियों पर फूल बरसाकर हिंदू वोटबैंक तक सीधा संदेश पहुंचाने का प्रयास करेंगे। इसे पार्टी के जनसंपर्क अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

योगी की दिल्ली यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि यह दौरा मुख्यमंत्री योगी द्वारा अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा सकता है, खासकर ऐसे समय में जब उनकी नेतृत्व क्षमता को लेकर अंदरखाने कुछ सवाल उठ रहे हैं।
हाल ही में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी अमित शाह से मुलाकात की थी, जिसे चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। मौर्य, जो ओबीसी समुदाय से आते हैं, को सियासी गलियारों में मुख्यमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।
बीजेपी आने वाले चुनावों में ओबीसी, दलित और पिछड़ा वर्ग पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है, और ऐसे में यदि यूपी नेतृत्व में बदलाव होता है, तो इसे पार्टी की सामाजिक समीकरण मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।हालांकि, अब तक बीजेपी की ओर से किसी भी प्रकार के नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। योगी आदित्यनाथ अभी भी पार्टी की यूपी रणनीति के केंद्र में बने हुए हैं और उनकी दिल्ली यात्रा को आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों का संकेत माना जा रहा है।
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