कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, जिसे ख़ारिज किया गया। हाईकोर्ट ने इससे पहले पार्वती के खिलाफ ईडी का समन रद्द कर दिया था।
यह मामला कर्नाटक के बहुचर्चित मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) भूमि आवंटन घोटाले से जुड़ा हुआ है, जिसकी अनुमानित राशि लगभग 5000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस मामले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। ईडी ने पार्वती को इसी सिलसिले में पूछताछ के लिए समन भेजा था, जिसे पार्वती ने कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
पार्वती की ओर से कोर्ट में कहा गया कि उन्हें एमयूडीए से मिले सभी 14 प्लॉट उन्होंने स्वेच्छा से सरेंडर कर दिए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी तर्क दिया कि उनके पास न तो कोई अवैध संपत्ति है और न ही उन्होंने अपराध से अर्जित किसी आय का उपभोग किया है। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए ईडी का समन रद्द कर दिया था।
हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ ईडी सुप्रीम कोर्ट पहुंची, लेकिन अब सर्वोच्च न्यायालय ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और ईडी की याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी को कानूनी रूप से बड़ी राहत मिल गई है।
MUDA घोटाले के तहत यह आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन ने कैसारे गांव की एक जमीन उपहार स्वरूप दी थी, जिसे बाद में मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण ने अधिग्रहित कर लिया। इसके बदले में पार्वती को मैसूरु के विजयनगर क्षेत्र में 38,223 वर्ग फीट के प्लॉट आवंटित किए गए। आरोप है कि विजयनगर क्षेत्र के इन प्लॉटों की कीमत उस मूल भूमि से कहीं अधिक है, जो कैसारे गांव में थी।
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