प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (27 जुलाई)को मन की बात कार्यक्रम के 124वें संस्करण में देशवासियों को संबोधित करते हुए विज्ञान, अंतरिक्ष और नवाचार के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘इंस्पायर मानक योजना’ का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना बच्चों में नवाचार की भावना को जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
प्रधानमंत्री ने इसरो के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की सकुशल धरती पर वापसी को देश के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा, “जब शुभांशु धरती पर लौटे, तो देशभर में उत्सव जैसा माहौल बन गया। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसने देश के बच्चों के मन में विज्ञान और अंतरिक्ष के प्रति नई जिज्ञासा जगाई है।”
इस संदर्भ में पीएम मोदी ने इंस्पायर मानक योजना की सराहना करते हुए बताया, “इस योजना के तहत हर स्कूल से पांच बच्चों को चुना जाता है, जो एक नया विचार लेकर आते हैं। अब तक लाखों बच्चे इससे जुड़ चुके हैं, और चंद्रयान-3 की सफलता के बाद इस योजना की लोकप्रियता दोगुनी हो गई है।”
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि देश में अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, “पांच साल पहले इस क्षेत्र में 50 से भी कम स्टार्टअप थे, लेकिन आज यह संख्या 200 के पार पहुंच चुकी है। यह भारत के नवाचार और विज्ञान के प्रति समर्पण को दर्शाता है।”
मोदी ने आगामी 23 अगस्त को मनाए जाने वाले ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ (National Space Day) का भी ज़िक्र किया और देशवासियों से आग्रह किया कि वे इसे रचनात्मक तरीके से मनाने के लिए अपने विचार नमो ऐप पर भेजें। प्रधानमंत्री ने विज्ञान और गणित के क्षेत्र में भारतीय छात्रों की उपलब्धियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारतीय छात्रों ने हाल ही में इंटरनेशनल केमिस्ट्री ओलंपियाड और इंटरनेशनल मैथेमेटिक्स ओलंपियाड में शानदार प्रदर्शन किया है। इनमें देवेश पंकज, संदीप कुची, देबदत्त प्रियदर्शी और उज्ज्वल केसरी जैसे छात्रों ने देश को गौरवान्वित किया है।
इसके साथ ही पीएम मोदी ने यह भी बताया कि अगले महीने मुंबई में खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी ओलंपियाड आयोजित किया जाएगा, जिसमें 60 से ज्यादा देशों के छात्र भाग लेंगे। उन्होंने कहा, “यह अब तक का सबसे बड़ा खगोल विज्ञान ओलंपियाड होगा। भारत अब ओलंपिक और ओलंपियाड दोनों में नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है।” प्रधानमंत्री के इस संबोधन ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि 21वीं सदी का भारत विज्ञान, नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में एक वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है।
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