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Friday, October 23, 2026
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हेपेटाइटिस के खिलाफ मजबूती से आगे बढ़ रहा भारत: जेपी नड्डा

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने भी इस अवसर पर कहा कि हमें हेपेटाइटिस के खिलाफ जन-जागरूकता के प्रयासों को और अधिक प्रभावशाली बनाना होगा।

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विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा है कि भारत इस वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती का मजबूती से सामना कर रहा है। हर साल 28 जुलाई को मनाया जाने वाला यह दिन वायरल हेपेटाइटिस के बारे में जागरूकता फैलाने और इसके रोकथाम व प्रबंधन के प्रयासों को मजबूत करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

नड्डा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “विश्व हेपेटाइटिस दिवस लोगों को इस बीमारी और इसकी रोकथाम के उपायों के प्रति जागरूक करने का एक प्रभावी मंच है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ‘राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम’ के माध्यम से इस चुनौती का डटकर मुकाबला कर रहा है और लोगों की जान बचाने में सफल हो रहा है।” उन्होंने इस वर्ष की थीम ‘हेपेटाइटिस: लेट्स ब्रेक इट डाउन’ को महत्वपूर्ण बताया, जो इस बीमारी से जुड़ी सामाजिक रुकावटों को दूर करने की आवश्यकता को उजागर करती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हेपेटाइटिस बी और सी के मामलों में भारत चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। वर्ष 2022 में भारत में 2.98 करोड़ हेपेटाइटिस बी और 55 लाख हेपेटाइटिस सी के मामले दर्ज हुए, जो वैश्विक मामलों का लगभग 11.6% है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने भी इस अवसर पर कहा कि हमें हेपेटाइटिस के खिलाफ जन-जागरूकता के प्रयासों को और अधिक प्रभावशाली बनाना होगा। उन्होंने कहा, “भारत में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के जरिए समय पर जांच, इलाज और टीकाकरण सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इस जानलेवा बीमारी से सुरक्षित किया जा सके।”

हेपेटाइटिस मुख्य रूप से पांच प्रकार के वायरस — ए, बी, सी, डी और ई — से होता है, जो लिवर को प्रभावित करते हैं। इन वायरसों के प्रसार के तरीके, गंभीरता और रोकथाम के उपाय अलग-अलग होते हैं। इस दिन का उद्देश्य वित्तीय, सामाजिक और प्रणालीगत बाधाओं, विशेषकर सामाजिक कलंक, को खत्म करने की दिशा में काम करना भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और उचित इलाज से हेपेटाइटिस बी और सी के मामलों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस को समाप्त करने के वैश्विक लक्ष्य को हासिल करने के लिए जांच और उपचार की पहुंच को व्यापक बनाना अत्यंत आवश्यक है।

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