भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में मिली मौत की सजा अब पूरी तरह से रद्द कर दी गई है। इस बात की पुष्टि भारत के ग्रैंड मुफ्ती कंथापुरम एपी अबूबक्कर मुसलियार के कार्यालय ने की है। समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, सना में एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। इससे पहले निमिषा की फांसी की तारीख 16 जुलाई तय की गई थी, लेकिन अंतिम समय पर ग्रैंड मुफ्ती मुसलियार के हस्तक्षेप के चलते सजा अस्थायी रूप से टाल दी गई थी। अब यह सजा पूरी तरह रद्द कर दी गई है, जिससे निमिषा और उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है।
ग्रैंड मुफ्ती के कार्यालय ने बयान जारी कर कहा, “निमिषा प्रिया की मौत की सजा जो पहले स्थगित की गई थी, उसे अब पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है। सना में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया।” निमिषा की बेटी 13 वर्षीय मिशेल और उनके पति थॉमस ने भारतीय ईसाई प्रचारक केए पॉल के साथ मिलकर यमन यात्रा की थी और हौती प्रशासन से उनकी रिहाई के लिए गुहार लगाई थी। समाचार एजेंसी PTI द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में मिशेल अपनी मां के लिए कहते हुए दिखी, “आई लव यू मम्मा,” जो मलयालम और अंग्रेजी में मिश्रित था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह कहा था कि वे निमिषा और उनके परिवार को पूर्ण सहायता प्रदान कर रहे हैं और मित्र देशों से भी संपर्क में हैं ताकि उन्हें मदद मिल सके।
ग्रैंड मुफ्ती अबूबक्कर मुसलियार ने बताया कि उन्होंने इसलिए हस्तक्षेप किया क्योंकि भारत की यमन से सीमित राजनयिक पहुंच है। उन्होंने कहा, “भारत ने अतीत में खाड़ी देशों और अन्य क्षेत्रों में इसी तरह के हस्तक्षेपों से सकारात्मक परिणाम देखे हैं। यमन जैसे देश के मामले में, जहां भारत की सीमित कूटनीतिक मौजूदगी है, वहां ऐसी पहल जरूरी थी।”
The death sentence of #Kerala nurse #NimishaPriya has been completely overturned by authorities in #Yemen, according to a statement from the office of the Grand Mufti of India, Kanthapuram AP Abubakar Musliyar.
“The death sentence of Nimisha Priya, which was previously… pic.twitter.com/Mvi7bXk9KL
— IndiaToday (@IndiaToday) July 29, 2025
बता दें की, निमिषा प्रिया को यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। यह हत्या जुलाई 2017 में हुई थी और 2020 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी। 2023 में हौती सुप्रीम जुडिशियल काउंसिल ने उनकी बेल याचिका खारिज कर दी थी और सजा को बरकरार रखा था। वे 16 जुलाई 2025 को फांसी पर चढ़ाई जाने वाली थीं।
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