आंध्र प्रदेश के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच कर रही एसआईटी (विशेष जांच दल) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। बुधवार (30 जुलाई) को हैदराबाद के बाहरी इलाके में स्थित एक फार्महाउस पर छापेमारी के दौरान एसआईटी ने 11 करोड़ रुपये नकद बरामद किए हैं। इस राशि को 12 कार्डबोर्ड बॉक्स में छिपाकर रखा गया था।
यह कार्रवाई घोटाले के आरोपी वरुण पुरुषोत्तम द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर की गई। आरोपी ने पूछताछ में अपनी भूमिका स्वीकारते हुए कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की थीं, जिसके बाद एसआईटी की टीम ने शमशाबाद मंडल के काचरम स्थित सुलोचना फार्म गेस्टहाउस में छापा मारा।
जांच एजेंसियों के अनुसार बरामद नकदी के साथ ही शराब की बड़ी खेप भी फार्महाउस से जब्त की गई है। यह बरामदगी उन कड़ियों को जोड़ रही है जो 2019 से 2024 के बीच वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की सरकार में हुए कथित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। एसआईटी की शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि वाईएसआरसीपी सरकार के पांच सालों के कार्यकाल में शराब नीति के नाम पर करीब 3,500 करोड़ रुपये की रिश्वत का नेटवर्क काम कर रहा था। इस नेटवर्क के जरिए शराब ब्रांड्स को मंजूरी दी गई, डिस्टिलरी कंपनियों से भारी रिश्वत ली गई, और नीतिगत फैसलों को निजी लाभ के लिए मोड़ा गया।
एसआईटी को वाईएसआरसीपी के वरिष्ठ नेताओं की संलिप्तता से जुड़ी कई अहम जानकारियां हाथ लगी हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि नई शराब नीति को योजनाबद्ध तरीके से बदला गया, जिससे कुछ खास कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया और राज्य सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ। एसआईटी अब तक इस घोटाले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें वाईएसआरसीपी के सांसद पीवी मिथुन रेड्डी का नाम भी शामिल है। जांच एजेंसियों ने कई नेताओं, अफसरों और व्यवसायियों से पूछताछ की है और उनकी संपत्तियों की जांच भी तेज कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में और कई बड़े नामों पर कार्रवाई हो सकती है। इस मामले की राजनीतिक और प्रशासनिक गूंज आंध्र प्रदेश की सियासत में एक नया मोड़ ला सकती है।
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