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IMF ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को संशोधित कर 6.4% किया!

वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी मामूली सुधार की उम्मीद

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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर नया आकलन जारी किया है। अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) रिपोर्ट में IMF ने वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर को संशोधित करते हुए 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। यह आंकड़े अप्रैल 2025 में किए गए पूर्वानुमान की तुलना में बेहतर माने जा रहे हैं और भारत के लिए एक सकारात्मक वैश्विक परिप्रेक्ष्य का संकेत देते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के लिए IMF ने भारत के विकास अनुमान को 20 आधार अंकों (bps) से बढ़ाकर 6.4% किया है, जबकि अगले वित्त वर्ष के लिए 10 आधार अंकों की बढ़ोतरी के साथ यही दर बनी रहेगी। IMF ने इन संशोधनों का कारण वैश्विक स्तर पर अनुकूल होते बाहरी वातावरण, बेहतर वित्तीय स्थितियों और कुछ क्षेत्रों में बढ़ते सरकारी खर्च को बताया है।

IMF की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक विकास दर 2025 में 3.0 प्रतिशत और 2026 में 3.1 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो पिछले अनुमानों की तुलना में थोड़ी अधिक है। इसमें टैरिफ से पहले किए जा रहे अग्रिम भुगतान, सीमित प्रभावी टैरिफ दरें, और वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता जैसी बातें योगदान दे रही हैं।

हालांकि, रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति में गिरावट की उम्मीद के बावजूद, अमेरिका जैसे कुछ देशों में यह अपने लक्ष्य से ऊपर बनी रह सकती है। इसके अलावा, टैरिफ नीति में अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, और विकासशील देशों में जोखिम प्रवृत्ति जैसे कारक वैश्विक विकास के लिए बाधा बन सकते हैं।

 

भारत के संदर्भ में IMF का यह संशोधित अनुमान सरकार की आर्थिक नीतियों और बुनियादी ढांचे में हुए सुधारों पर विश्वास दर्शाता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत जैसे उभरते बाजारों में 2025 में 4.1% और 2026 में 4.0% की औसत वृद्धि दर रहने की उम्मीद है।

हालांकि, IMF ने यह भी स्पष्ट किया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने नकारात्मक जोखिम अब भी बरकरार हैं। “यदि टैरिफ में वृद्धि, राजनीतिक अस्थिरता या राजकोषीय घाटा बढ़ता है, तो यह वैश्विक विकास को धीमा कर सकता है।” रिपोर्ट में कहा गया।

सकारात्मक पक्ष यह है कि अगर वैश्विक व्यापार वार्ताएं सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती हैं और शुल्कों में कमी आती है, तो यह न केवल वैश्विक विकास को गति दे सकती है बल्कि भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं को भी अतिरिक्त बल मिल सकता है। इस संशोधित अनुमान के साथ IMF ने संकेत दिया है कि भारत आने वाले वर्षों में विश्व आर्थिक मंच पर अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकता है — बशर्ते वैश्विक अस्थिरता और घरेलू सुधार दोनों का संतुलन बना रहे।

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