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अमेरिका घरेलू उद्योग की सुरक्षा को 350% तक का टैरिफ लगाता है : डब्ल्यूटीओ डेटा!

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के डेटा के मुताबिक, अमेरिका बेवरेज एवं तंबाकू उत्पादों पर 350 प्रतिशत टैरिफ लगाता है।

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यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत की ओर से विदेशी उत्पादों पर लगाए जाने वाले टैरिफ कई अन्य देशों के मुकाबले काफी अधिक है, लेकिन अमेरिका स्वयं अपने घरेलू बिजनेस को सुरक्षित रखने के लिए उत्पादों पर 350 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाता है।

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के डेटा के मुताबिक, अमेरिका बेवरेज एवं तंबाकू उत्पादों पर 350 प्रतिशत टैरिफ लगाता है। वहीं, फल और सब्जियों पर 132 प्रतिशत, अनाज पर 196 प्रतिशत, तिलहन एवं तेल पर 164 प्रतिशत, डेयरी उत्पादों पर 200 प्रतिशत, मछली एवं मछली उत्पादों पर 35 प्रतिशत और खनिजों एवं मेटल पर 38 प्रतिशत का टैरिफ लगाता है।

दूसरी ओर, भारत व्हिस्की और वाइन पर 150 प्रतिशत और ऑटोमोबाइल पर 100-125 प्रतिशत शुल्क लगाता है। जापान भी चावल पर लगभग 400 प्रतिशत, कोरिया फलों और सब्जियों पर 887 प्रतिशत का शुल्क लगाता है।

भारत की औसत टैरिफ दर 17 प्रतिशत है, जबकि प्रमुख अमेरिकी आयातों पर वास्तविक शुल्क काफी कम है। भारत को अमेरिकी निर्यात पर भारित औसत टैरिफ 5 प्रतिशत से कम है। भारत ने व्यापार अधिशेष को कम करने के लिए अमेरिका से पहले ही अधिक तेल और गैस खरीदना शुरू कर दिया है और इन खरीदों को बढ़ाने की भी पेशकश की है।

ट्रंप प्रशासन के द्वारा घोषित किए गए रेसिप्रोकल टैरिफ से छूट के बदले में भारत ने अमेरिका के लिए कुल सेक्टर्स में अपना बाजार खोलने की पेशकश की है, जिससे औसत शुल्क 13 प्रतिशत से घटकर 4 प्रतिशत हो सकता है।

एमपी फाइनेंशियल एडवाइजरी सर्विसेज एलएलपी के संस्थापक और प्रबंध साझेदार महेंद्र पाटिल के अनुसार, भारतीय निर्यात पर 25 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लगाना कपड़ा, रत्न एवं आभूषण, ऑटो कंपोनेंट और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव का संकेत है।

उन्होंने कहा, “भारतीय उद्योग जगत को तत्काल प्राथमिक बाजारों में विविधता लाने, मूल्यवर्धन में तेजी लाने और वैश्विक व्यापार की अनिश्चितता का बेहतर ढंग से सामना करने के लिए घरेलू बफर होगा।”

भारत एक घरेलू उपभोग केंद्रित अर्थव्यवस्था बना हुआ है, जिसका उपभोग कुल सकल घरेलू उत्पाद का 60 प्रतिशत है। दूसरी ओर, वित्त वर्ष 2024 में व्यापारिक निर्यात की कुल सकल घरेलू उत्पाद में हिस्सेदारी केवल 12 प्रतिशत थी।

 
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