फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर सोमवार (4 अगस्त) से भारत की अपनी पहली आधिकारिक राजकीय यात्रा पर पहुंचे। इसे दौरे से न केवल भारत-फिलीपींस के 75 वर्षों के राजनयिक संबंधों को मजबूती देना है, बल्कि रक्षा, व्यापार और सामुद्रिक सहयोग के अहम क्षेत्रों में रिश्तों को नए स्तर तक ले जाने की कोशिश की जानी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत आए राष्ट्रपति मार्कोस के साथ उनकी पत्नी लुईस अरानेटा मार्कोस, कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और कारोबारी प्रतिनिधि शामिल हैं।
दिल्ली में 5 अगस्त को राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस की पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक तय की गई है, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक साझेदारी जैसे प्रमुख मुद्दों पर अहम् चर्चा होनी है। इसके अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात करेंगे।
नई दिल्ली में कार्यक्रमों के बाद राष्ट्रपति मार्कोस का बेंगलुरु दौरा तय है जहां वे भारतीय उद्योग जगत से मुलाकात करेंगे और निवेश व तकनीकी सहयोग के अवसरों पर चर्चा करेंगे। यह यात्रा भारत और फिलीपींस के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूती देने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
ज्ञात हो की भारत और फिलीपींस के बीच रक्षा संबंध अब इस साझेदारी की सबसे मज़बूत कड़ी बन चुके हैं। जनवरी 2022 में मनीला ने $374.9 मिलियन डॉलर की ब्रह्मोस मिसाइल डील पर हस्ताक्षर किए, जिससे वह इस मिसाइल प्रणाली की पहली विदेशी खरीदार बन गई। इस डील की पहली खेप 19 अप्रैल 2024 को मनीला को सौंप दी गई, जिसने दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों में एक बड़ा कदम जोड़ा। दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच पैसेज एक्सरसाइज, सफेद जहाज सूचना साझा करने, और संयुक्त समुद्री निगरानी जैसी पहलें अब नियमित हो गई हैं।
फिलीपींस के कोस्ट गार्ड और सेना के वरिष्ठ अधिकारी भी पिछले दो वर्षों में कई बार भारत आ चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि रक्षा शिक्षा, प्रशिक्षण और उद्योग के क्षेत्र में गहरा तालमेल बन चुका है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-फिलीपींस के बीच द्विपक्षीय व्यापार $3.53 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें भारत को $2.09 अरब का व्यापार अधिशेष रहा। भारत के प्रमुख निर्यातों में इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स, दवाएं (भारत ASEAN को कुल फार्मा निर्यात का 20% भेजता है), स्टील, पेट्रोलियम उत्पाद और चावल, शामिल हैं।
फिलीपींस से भारत का प्रमुख आयात इलेक्ट्रॉनिक मशीनें और सेमीकंडक्टर, तांबा, सीसा और कीमती पत्थर, खाद्य अवशेष और पशु चारा के रूप में होता है।
भारतीय कंपनियों ने फिलीपींस में लगभग $5 अरब डॉलर का निवेश किया है, खासकर आईटी, बीपीओ, फार्मा, कृषि और एफएमसीजी क्षेत्रों में। वहीं, फिलीपींस की कंपनियों ने भारत में ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर में रुचि दिखाई है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए 2022 में कस्टम्स सहयोग समझौता हुआ था। व्यापार समझौता (PTA) को लेकर भी 2023 से बातचीत चल रही है।
फिलीपींस ने हाल ही में भारतीय नागरिकों के लिए वीजा मुक्त यात्रा की सुविधा दी है और 2025 के अंत तक प्रत्यक्ष उड़ानों के पुनः आरंभ की योजना है। फिलीपींस दक्षिण चीन सागर में समुद्री चुनौतियों का सामना कर रहा है, जहां भारत लगातार नेविगेशन की स्वतंत्रता और यथास्थिति में बदलाव के विरोध की नीति पर कायम है। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में लोकतांत्रिक मूल्यों और क्षेत्रीय स्थिरता के साझा हित रखते हैं।
विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को भारत की ‘Act East’ नीति और ‘महासागर दृष्टि’ का हिस्सा बताया है, जो भारत को ASEAN देशों से और जोड़ता है। हालांकि इस दौरे को डोनाल्ड ट्रम्प के भारत से छिड़ चुके टैरिफ धमकियों की झड़ी के कारण व्यापार में विभिन्नता के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रपति मार्कोस की यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक राजकीय दौरा नहीं है, यह फिलीपींस के लिए बदलते रणनीतिक समीकरण और भारत के व्यापार, निवेश वृद्धी के जरिए साझेदारी का अहम् पड़ाव कहा जा रहा है। इस दौरे से उम्मीद है कि दोनों देश सुरक्षा, व्यापार, तकनीक और सांस्कृतिक साझेदारी के नए युग में प्रवेश करेंगे।
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